रामनवमी पर चंदौली में भक्ति की गूंज, भगवान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण की भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न

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रामनवमी पर चंदौली में भक्ति की गूंज, भगवान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण की भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न

चंदौली (नौगढ़) : रामनवमी के पावन अवसर पर चंदौली जनपद के नौगढ़ क्षेत्र स्थित कोइरलवा हनुमान मंदिर परिसर में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। मंदिर के ठीक सामने एक नए मंदिर में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की दिव्य प्रतिमाओं की विधिपूर्वक प्राण प्रतिष्ठा की गई।

इस धार्मिक आयोजन के लिए मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं का मंदिर की ओर तांता लगना शुरू हो गया था। क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में भक्तजन रामनवमी पर दर्शन-पूजन हेतु पहुंचे और भगवान श्रीराम के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ प्रतिष्ठा समारोह

पूरे समारोह में वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार, यज्ञ, हवन और विशेष पूजन विधियां सम्पन्न की गईं। पुरोहितों ने पूरी निष्ठा से श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी की प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा की, जिससे उन्हें मंदिर में एक जीवंत दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया।

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह का रहा विशेष योगदान

इस भव्य मंदिर निर्माण और प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह का विशेष योगदान रहा। उन्होंने मंदिर निर्माण में आर्थिक और सामाजिक रूप से पूर्ण सहयोग दिया। साथ ही आयोजन की तैयारियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। क्षेत्रीय जनता ने उनके इस योगदान की भूरी-भूरी प्रशंसा की और उनका आभार जताया।

भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम

प्राण प्रतिष्ठा के इस अवसर पर कोइरलवा हनुमान मंदिर परिसर पूरी तरह भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन करती रहीं, वहीं बच्चों और युवाओं में भी भारी उत्साह देखने को मिला।

स्थानीय लोगों में दिखा गहरी आस्था

यह आयोजन केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आस्था, एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा। स्थानीय लोगों ने इस कार्यक्रम में दिल खोलकर भाग लिया और इसे एक यादगार उत्सव का रूप दिया।

समिति ने दिए भविष्य के आयोजन के संकेत

मंदिर समिति ने भविष्य में भी ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की योजना बनाने की बात कही, जिससे समाज में अध्यात्मिक चेतना बनी रहे और युवा पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोड़ने का कार्य होता रहे।

रामनवमी के दिन कोइरलवा हनुमान मंदिर में हुआ यह आयोजन क्षेत्रवासियों के लिए न केवल एक धार्मिक पर्व था, बल्कि यह एक नई शुरुआत का प्रतीक बनकर उभरा, जिसमें श्रद्धा, सेवा और समाज का सामूहिक प्रयास देखने को मिला।