चंदौली में खनन विभाग पर लगा भ्रष्टाचार का दाग, खनन अधिकारी गुलशन कुमार समेत अन्य पर FIR, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
चंदौली : जनपद चंदौली एक बार फिर भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों के कारण चर्चा में आ गया है। इस बार मामला सीधे खनन विभाग से जुड़ा है, जहां खनन अधिकारी गुलशन कुमार और उनके अन्य साथियों पर गिट्टी लदी ट्रकों से अवैध वसूली, मारपीट और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिले में हड़कंप मच गया है, वहीं प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रक मालिक बृजेश यादव निवासी दवोपुर, थाना नंदगंज (गाजीपुर) ने ADG वाराणसी जोन पीयूष मोर्डिया को एक शिकायत पत्र सौंपा था, जिसमें उसने गंभीर आरोप लगाए कि खनन अधिकारी गुलशन कुमार द्वारा उसकी चार गिट्टी लदी ट्रकों को सकलडीहा-धानापुर मार्ग पर रोका गया। आरोप है कि ट्रकों के कागजात वैध होने के बावजूद खनन अधिकारी ने प्रति ट्रक ₹1 लाख की मांग की। बाद में यह मांग ₹2 लाख तक जा पहुंची।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाते हुए तहरीर दी कि दो ट्रकों को ₹2 लाख लेकर छोड़ दिया गया, जबकि बाकी दो ट्रकों के लिए ₹70,000 पर ट्रक मालिक ने मना लिया। उसके बावजूद ट्रकों को जब्त कर लिया गया। यही नहीं, ड्राइवरों के साथ मारपीट भी की गई। पूरे घटनाक्रम में गुलशन कुमार के साथ पांच अन्य लोग भी शामिल थे, जो कथित रूप से उनके साथ मिलकर वसूली और दबाव बनाने का काम करते थे।
ADG के निर्देश पर FIR
इस शिकायत के आधार पर पुलिस हरकत में आई और सकलडीहा थाने में खनन अधिकारी गुलशन कुमार समेत छह लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मारपीट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह FIR जिले में सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है।
पहले भी रही है चंदौली चर्चा में
यह पहली बार नहीं है जब चंदौली में किसी सरकारी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इससे पहले पूर्व ARTO आर.एस. यादव पर ट्रकों से अवैध वसूली और भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। उनके खिलाफ कार्यवाही भी हुई थी, और वह केस तत्कालीन समय में उत्तर प्रदेश का सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामला बना था। अब एक बार फिर चंदौली का नाम इसी तरह के मामलों के चलते सुर्खियों में है।
प्रशासन सख्त, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
इस गंभीर प्रकरण को लेकर चंदौली के प्रभारी जिलाधिकारी एवं ADM राजेश कुमार ने कहा है कि मामले की जांच मजिस्ट्रेट स्तर से कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ शासन को पत्र भेजकर विभागीय और कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
खनन माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों की गठजोड़ पर सवाल
इस पूरे प्रकरण ने चंदौली जिले में खनन माफिया और सरकारी अफसरों के बीच गठजोड़ को उजागर कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, खनन अधिकारी का एक संगठित गिरोह काम कर रहा था, जो बालू, गिट्टी और मोरंग की गाड़ियों से अवैध वसूली करता था और भारी मात्रा में सरकारी राजस्व की क्षति पहुंचा रहा था।
निष्कर्ष
चंदौली में खनन विभाग से जुड़ा यह मामला प्रशासन, पुलिस और आम जनता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। एक ओर जहां सरकारी अधिकारी ही भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोग शोषण और आर्थिक नुकसान के शिकार हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि मजिस्ट्रेट जांच के बाद शासन किस स्तर तक कार्यवाही करता है और क्या वाकई दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जाता है या मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


















