देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम, सज रहा कान्हा के दरबार, जानें विधि और मुहूर्त
यूपी टाइम्स18 : देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज धूमधाम से मनाई जा रही है. देश के विभिन्न मंदिरों में खास तैयारियां की गई हैं. जन्माष्टमी हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है. इस त्योहार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाता है. द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि की रात्रि भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हुए थे. उस समय रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि का चंद्र था. आज रात्रि भी वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र का चंद्र रहेगा. भगवान श्रीकृष्ण रात्रि में अवतरित हुए थे इसलिए जन्माष्टमी रात्रि में मनाने की परंपरा है. जन्मोत्सव की विशेष पूजा रात्रि करीब 12 बजे करनी चाहिए, क्योंकि श्रीकृष्ण मध्य रात्रि में प्रकट हुए थे.

पूजा के लिए जरूरी चीजें
भगवान को स्नान कराने के लिए बड़ा बर्तन, तांबे का लोटा, कलश, दूध, पीले चमकीले वस्त्र, आभूषण, चावल, चंदन, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध, तुलसी, तिल, इञ, अबीर, गुलाल, जनेऊ, मोरपंख, बांसुरी, फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, माखन-मिश्री, पान, दक्षिणा, दूर्वा आदि.
पूजन विधि
◆ सबसे पहले गणेश पूजा करें.
◆ गणेश जी को जल-दूध से स्नान कराएं.
◆ वस्त्र पहनाएं, फूल चढ़ाएं.
◆ धूप-दीप जलाएं, चावल, दूर्वा, जनेऊ चढ़ाएं.
◆ गणेश जी के बाद कान्हा जी को शुद्ध जल से स्नान कराएं, फिर पंचामृत से और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं.
◆ भगवान को झूले में या किसी आसन पर विराजित करें.
◆ वस्त्र, हार-फूल, मोरपंख और आभूषणों से भगवान का श्रृंगार करें.
◆ अबीर, गुलाल, इत्र चढ़ाएं, भगवान के पास बांसुरी रखें.
◆ फल, मिठाई, जनेऊ, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, पान, दक्षिणा और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं.
◆ चंदन-कुमकुम से तिलक करें, धूप-दीप जलाएं.
◆ तुलसी के पत्तों के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं.
◆ कुं कृष्णाय नमः मंत्र का जप 108 बार करें.
◆ कर्पूर जलाएं, आरती करें, आरती के बाद परिक्रमा करें.
◆ पूजा में हुई जानी-अनजानी भूल के लिए क्षमा याचना करें.
◆ अंत में भक्तों को प्रसाद बांट दें और खुद भी लें.
नोट – भगवान श्रीकृष्ण के साथ बलराम, यशोदा मैया और गौ माता की भी पूजा करेंगे तो बहुत शुभ रहेगा.
जन्माष्टमी व्रत कैसे करें?
● सुबह भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें और भगवान के सामने व्रत करने का संकल्प लें.
● जन्माष्टमी पर दिनभर निराहार रहना चाहिए. निराहार रहना यानी अन्न नहीं खाना.
● भूखे रहना संभव न हो तो मौसमी फल, फलों का रस, सूखे मेवे, दूध का सेवन कर सकते हैं.
● राजगीरा, सिंघाड़ा या आलू से बनी चीजें खाई जा सकती हैं.
● भगवान की कथाएं पढ़ें-सुनें, मंत्रों का जप करें.
● दान-पुण्य करें. गौ माता को हरी घास खिलाएं.
● अगले दिन यानी नवमी तिथि पर पूजा के बाद खाना खा सकते हैं.
● बूढ़े, गर्भवती, बच्चे और रोगी को व्रत करने से बचना चाहिए. ये लोग पूजा-पाठ, दान-पुण्य, मंत्र जप और ग्रंथों का पाठ कर सकते हैं.










