नहर पाटकर कब्जे के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, तीन गांवों की 200 एकड़ खेती पर संकट, आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी

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नहर पाटकर कब्जे के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, तीन गांवों की 200 एकड़ खेती पर संकट, आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी

चंदौली : चहनियां क्षेत्र के सुरतापुर गांव में नहर पाटकर जमीन कब्जाने के आरोप को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों और किसानों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने के साथ-साथ चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।

ग्रामीणों का आरोप है कि सुरतापुर गांव से होकर गुजरने वाली यह नहर वर्षों पुरानी है, जिससे सुरतापुर, हिनौता और परसिया गांव के किसान सिंचाई करते आ रहे हैं। इस नहर के सहारे तीनों गांवों की लगभग दो सौ एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है और सैकड़ों किसान अपनी खेती इसी पर निर्भर होकर करते हैं।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि गांव के कुछ लोगों द्वारा नहर को पाटकर उस पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि राजस्व विभाग के लेखपाल द्वारा पहले ही जमीन की पैमाइश कर संबंधित लोगों को उनके हिस्से की भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके बावजूद नहर को बंद कर रास्ते और जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और बीज डालने का मौसम शुरू हो चुका है। यदि नहर विभाग द्वारा पानी छोड़ा जाता है और नहर पटी रहती है, तो एक ओर जहां हिनौता और परसिया के किसान सिंचाई से वंचित हो जाएंगे, वहीं दूसरी ओर सुरतापुर क्षेत्र के कई खेत जलमग्न होने का खतरा पैदा हो जाएगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

प्रदर्शन में शामिल अर्पित मिश्रा, राजदेव यादव, दूधनाथ, अशोक यादव, संतोष यादव, विनोद, नीरज, सुशील, रौनक और सचिन सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर नहर को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि यदि अधिकारियों ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।