मसोई में शिव महापुराण कथा का चौथा दिवस, सती चरित्र व राम लीला प्रसंग से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

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मसोई में शिव महापुराण कथा का चौथा दिवस, सती चरित्र व राम लीला प्रसंग से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

चंदौली :  चकिया क्षेत्र के मसोई गांव में आयोजित सप्त दिवसीय शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर कथावाचक शिवम शुक्ला जी महाराज ने माता सती के चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। कथा में भगवान शिव, माता सती और अगस्त ऋषि के प्रसंग को विस्तार से सुनाते हुए उन्होंने बताया कि कैसे माता सती को अहंकारवश भगवान श्रीराम के स्वरूप पर संदेह हुआ।

कथा वाचक शिवम शुक्ला जी ने कहा कि भगवान शिव ने स्वयं श्रीराम को सच्चिदानंद मानकर प्रणाम किया, लेकिन माता सती ने उनकी परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप धारण किया। भगवान श्रीराम ने उन्हें पहचान लिया, जिससे सती का संशय दूर तो हुआ, लेकिन उनके इस आचरण से भगवान शिव ने मन ही मन उनका त्याग कर दिया।

कथा के दौरान दक्ष यज्ञ का प्रसंग भी सुनाया गया, जिसमें पिता द्वारा भगवान शिव के अपमान से आहत होकर माता सती ने योग अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। इसके बाद भगवान शिव के क्रोध से उत्पन्न वीरभद्र ने यज्ञ का विध्वंस कर दिया।

उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि भगवान शिव और भगवान हरि की निंदा करने वाले व्यक्ति का कभी कल्याण नहीं होता। साथ ही, माता पार्वती जन्म प्रसंग के माध्यम से समाज को बेटियों के महत्व को समझाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि पुत्र और पुत्री में कोई भेद नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई बार एक पुत्री ही वह कार्य कर देती है जो सौ पुत्र भी नहीं कर पाते। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में सराबोर होकर कथा का श्रवण किया।