चंदौली के अरविंद पाण्डेय ने दिल्ली में रचा इतिहास, गिरमिटिया भारतीयों के शोध को मिला नया मंच
चंदौली : जिले की प्रतिभाएं देश की राजधानी दिल्ली में अपनी पहचान लगातार मजबूत कर रही हैं। इसी कड़ी में चंदौली निवासी एवं ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल के प्रबंध निदेशक अरविंद पाण्डेय की महत्वपूर्ण भूमिका में दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कॉलेज में मंगलवार को ‘गिरमिटिया अध्ययन एवं भारतीय प्रवासी अनुसंधान चेयर’ का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस पहल ने न केवल भारतीय प्रवासियों के इतिहास और विरासत को अकादमिक शोध से जोड़ने का नया रास्ता खोला, बल्कि चंदौली की पहचान को भी देश-विदेश में एक नई उपलब्धि से जोड़ा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन भारत में सूरीनाम की राजदूत हानिशा जयराम ने किया। दिल्ली विश्वविद्यालय, ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल और लक्ष्मीबाई कॉलेज के संयुक्त सहयोग से स्थापित इस चेयर का उद्देश्य दुनिया के विभिन्न देशों में बसे भारतीय मूल के लोगों, विशेषकर गिरमिटिया भारतीयों के इतिहास, संघर्ष, संस्कृति, भाषा, साहित्य और सामाजिक विकास पर व्यवस्थित एवं गंभीर अकादमिक शोध को बढ़ावा देना है।
दिल्ली में चंदौली के अरविंद पाण्डेय की खास भूमिका
कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणि, ट्रेजरर प्रो. मिथुन कुमार, लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्राचार्य प्रो. लता शर्मा सहित शिक्षा और शोध जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। वहीं चंदौली के अरविंद पाण्डेय की इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल में सक्रिय भूमिका विशेष रूप से चर्चा में रही। चेयर के चेयर एवं कोऑर्डिनेटर डॉ. सुनील कुमार मिश्रा ने भी आयोजन को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
चंदौली से दिल्ली और अब दुनिया तक पहुंची पहल
गिरमिटिया भारतीयों के इतिहास को शोध और अकादमिक विमर्श के केंद्र में लाने की दिशा में लंबे समय से कार्यरत ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल के प्रबंध निदेशक अरविंद पाण्डेय का संबंध चंदौली से होना जिले के लिए गौरव का विषय है। दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस चेयर की स्थापना को चंदौली की धरती से उठी आवाज का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच तक पहुंचना माना जा रहा है।
गिरमिटिया इतिहास के शोध को नई उड़ान
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गिरमिटिया भारतीयों की गाथा महज विदेशों में हुए प्रवास की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें संघर्ष, श्रम, त्याग, पहचान, संस्कृति और भारतीय विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने का इतिहास समाहित है। नई चेयर विद्यार्थियों और शोधार्थियों को इस महत्वपूर्ण इतिहास पर गंभीर अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराएगी।
भारत-सूरीनाम संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम
सूरीनाम की राजदूत हानिशा जयराम ने चेयर की स्थापना को भारत और भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने भारतीय मूल के लोगों की सांस्कृतिक जड़ों और विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
गिरमिटिया इतिहास से जुड़ा चंदौली का नाम
दिल्ली में हुआ यह आयोजन चंदौली के लिए इसलिए भी खास रहा कि जिले से जुड़े अरविंद पाण्डेय ने भारतीय प्रवासी इतिहास को विश्वविद्यालयी शोध के केंद्र तक पहुंचाने वाली इस महत्वपूर्ण पहल में अग्रणी भूमिका निभाई। इससे चंदौली का नाम अब गिरमिटिया भारतीयों के इतिहास, संस्कृति और वैश्विक भारतीय विरासत से जुड़े अकादमिक विमर्श के साथ भी जुड़ गया है।
गिरमिटिया शोध को मिलेगी नई दिशा
कार्यक्रम को डॉ. सीमा शर्मा, राकेश पाण्डेय, भावना सक्सेना, डॉ. दीप्ति अग्रवाल और प्रो. ओंकार नाथ उपाध्याय ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि इस चेयर के माध्यम से गिरमिटिया इतिहास, भारतीय डायस्पोरा और वैश्विक स्तर पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े शोध को नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम का संचालन ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल के प्रबंध निदेशक एवं चंदौली निवासी अरविंद पाण्डेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुनीता अरोड़ा ने किया।













