गंगा के कहर से कांपा चंदौली, तटवर्ती गांवों में दहशत, राहत चौकियों में शरण ले रहे ग्रामीण
चंदौली : इस बार गंगा अपने रौद्र रूप में है। सोमवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए 72 मीटर से ऊपर पहुंच गया। लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन और आमजन को चिंता में डाल दिया है। खासकर चहनियां क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में डर और दहशत का माहौल है। लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं, वहीं प्रशासन ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए गांव खाली कराने का अभियान तेज कर दिया है।
हसनपुर सबसे ज्यादा प्रभावित, प्राथमिक विद्यालय बना राहत केंद्र
सबसे अधिक संकट में हसनपुर गांव नजर आ रहा है, जहां गंगा का पानी घरों की देहरी तक पहुंच गया है। जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से ग्रामीणों को मारूफपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए बाढ़ राहत केंद्र में शिफ्ट किया है। राहत केंद्र में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने शरण ली है। प्रशासन द्वारा यहां खाद्य सामग्री, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

बलुआ व टांडा में घुसा गंगा का पानी, बाजारों में पसरा सन्नाटा
गंगा का उफान इतना तेज है कि बलुआ बाजार और टांडा कला बाजार जलमग्न हो चुके हैं। दुकानों में पानी भर जाने से व्यवसाय ठप हो गया है और सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। दूसरी ओर, बाणगंगा नदी भी उफान पर है, जिससे इसके किनारे बसे गांवों के खेतों में पानी भर गया है। धान, सब्जी और दलहन की फसलें डूबने की कगार पर हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

200 साल पुराना बरगद धराशायी, श्मशान घाट भी डूबा
टांडा स्थित घटवारी माता मंदिर का 200 साल पुराना विशाल बरगद का पेड़, जो पूरे इलाके की पहचान माना जाता था, गंगा के तेज बहाव में गिर गया है। यह घटना बाढ़ की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। वहीं बलुआ घाट का श्मशान स्थल भी जलमग्न हो गया है। अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को अब सराय घाट तक जाना पड़ रहा है। प्रशासन को आशंका है कि अगर जलस्तर यूं ही बढ़ता रहा तो जल्द ही वहां भी जगह नहीं बचेगी।

प्रशासन सतर्क, राहत व निगरानी कार्य तेज
एसडीएम कुंदन राज कपूर के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है। बाढ़ चौकियों पर ग्रामीणों और उनके मवेशियों को सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है। साथ ही नायब तहसीलदार राजेन्द्र प्रसाद और एडीओ पंचायत राजेश सिंह ने मारूफपुर राहत केंद्र पर पहुंचकर वहां शरण लेने वालों के लिए नाश्ता और भोजन की समुचित व्यवस्था कराई। हर गांव में प्रशासनिक टीमें जाकर लाउडस्पीकर से लोगों को अलर्ट कर रही हैं और जरूरतमंदों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

अगले 2–3 दिन अहम, जलस्तर में गिरावट की उम्मीद
प्रशासन का अनुमान है कि यदि बारिश की तीव्रता कम रही, तो अगले दो से तीन दिनों में गंगा का जलस्तर घट सकता है। फिलहाल जिले के कई हिस्से जलमग्न हैं और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। लेकिन राहत की बात यह है कि प्रशासन ने समय रहते जरूरी कदम उठाए हैं और ग्रामीणों को राहत व सुरक्षा प्रदान करने का हर संभव प्रयास जारी है।

निष्कर्ष
चंदौली में गंगा की बाढ़ से उत्पन्न संकट विकराल होता जा रहा है। लेकिन प्रशासन की सतर्कता और स्थानीय लोगों की सजगता इस आपदा से पार पाने में मददगार साबित हो रही है। आने वाले दिन जिले के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, पर एकजुटता और सहयोग से इस मुश्किल घड़ी से भी पार पाया जा सकता है।


















