295 साल में पहली बार मां अन्‍नपूर्णा करेंगी काशी भ्रमण, भगवान भोलेनाथ लेंगे भिक्षा, रूट मैप हो रहा तैयार

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295 साल में पहली बार मां अन्‍नपूर्णा करेंगी काशी भ्रमण, भगवान भोलेनाथ लेंगे भिक्षा, रूट मैप हो रहा तैयार

वाराणसी : काशी पुराधिपति महादेव को अन्‍नदान करने वालीं मां अन्‍नपूर्णा सदियों में पहली बार काशी का भ्रमण करेंगी. अन्‍नपूर्णा मंदिर में आयोजित होने वाले कुंभाभिषेक का मौका होगा. पांच दशक बाद आगामी फरवरी में होने जा रहे कुंभाभिषेक के अंतर्गत मां अन्‍नपूर्णा की नगर भ्रमण यात्रा के लिए रजत पालकी का निर्माण करवाया जा रहा है. साथ ही विश्‍वनाथ मंदिर के बगल में स्थित मां अन्‍नपूर्णा मंदिर का 14 फुट ऊंचा शिखर स्‍वर्णिम आभा से दमकेगा. साढ़े तीन करोड़ की लागत से करीब पांच किलोग्राम सोने की प्‍लेट शिखर पर चढ़ाई जाएगी. कुंभाभिषेक के दौरान स्‍वर्णमंडित शिखर का अभिषेक होगा.

काशी में वर्ष 1729 में पेशवा बाजीराव ने अन्‍नपूर्णा मंदिर का निर्माण करवाया था. इस मंदिर में अन्‍नदात्री की ठोस स्‍वर्ण प्रतिमा कमलासन पर विराजमान है तो रजत शिल्‍प में ढले भोलेनाथ याचक की भूमिका में खड़े हैं. मां अन्‍नपूर्णा के दायीं ओर मां लक्ष्मी और बाएं भाग में भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है. स्‍वर्ण प्रतिमा वाला मंदिर साल में सिर्फ धनतेरस के दिन खुलता है. मंदिर में पांच दशक बाद होने वाले कुंभाभिषेक के लिए इन दिनों तैयारियां जोर-शोर से चल रही है.

अन्‍नपूर्णा मठ मंदिर के महंत गोस्‍वामी शंकरपुरी ने बताया कि 295 साल के इतिहास में पहली बार निकलने वाली मां की यह शोभायात्रा ऐतिहासिक होगी. इसका रूट मैप तैयार किया जा रहा है. यात्रा का मार्ग ऐसा तय किया जाएगा कि काशी की शास्‍त्रीय सीमा के अंदर अधिक से अधिक क्षेत्र इसमें समाहित हो सके, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा काशीवासियों को माता के दर्शन प्राप्‍त हो सकें. इसमें सिर्फ दक्षिण भारत से ही 10 हजार से ज्‍यादा अधिक भक्‍त शामिल होंगे.

गाय के गोबर से बने पेंट से मंदिर की रंगाई

कुंभाभिषेक के तहत माता अन्‍नपूर्णा मंदिर परिसर की गाय के गोबर से बने रंग से रंगाई होगी. शिखर से लेकर गर्भगृह तक चढ़ाए गए रासायनिक पेंट को बेंगलुरु से मंगाई गई मशीनों से उतारा जा रहा है. इसके बाद गाय के गोबर से बना पेंट लगाया जाएगा. इस पेंट की खासियत है कि यह एक दशक तक यथावत रहेगा. उसके बाद धीरे-धीरे रंग अपने आप उड़ जाएगा. ऐसे में इसे छुड़ाने की जरूरत नहीं होगी. जिससे मंदिर के शिखर बनाने में प्रयुक्‍त हुए चुनार के गुलाबी पत्‍थर अपने मूल रूप में फिर दिखाई देने लगेंगे.

भिक्षा लेते थ्री-डी आकृति दिखेगी

कुंभाभिषेक के दौरान अन्‍नपूर्णा मंदिर के मुख्‍य द्वार पर मां अन्‍नपूर्णा से भिक्षा लेते हुए भगवान शंकर की थ्री-डी आकृति दिखाई देगी. यह बनकर तैयार हो गई है. मंदिर परिसर की दीवारों पर माता अन्‍नपूर्णा की कथा से संबंधित प्रसंगों पर आधारित चित्र शृंखला बनाई जाएगी. मंदिर के शिखरों पर की गई नक्‍काशी को दुरुस्‍त करने का काम इन दिनों चल रहा है. इस काम के लिए सिद्धहस्‍त कारीगरों की 10 सदस्‍यीय टीम दिन-रात जुटी है.