कलेक्ट्रेट सभागार में किसान दिवस का आयोजन, किसानों की समस्याओं पर डीएम हुए सख्त, विभागों को दिए कड़े निर्देश
चंदौली : जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में किसान दिवस का आयोजन बड़े ही गंभीर और सार्थक माहौल में संपन्न हुआ। बैठक में किसानों की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर विभागीय अधिकारियों से कड़े सवाल-जवाब हुए और जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों की परेशानियों को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
बैठक की शुरुआत उप निदेशक कृषि द्वारा पिछली बैठक की कार्यवृत्त प्रस्तुति से हुई। इसके बाद किसानों ने खुलकर अपनी समस्याएं जिलाधिकारी के सामने रखीं। किसानों ने बताया कि धानापुर और सकलडीहा फीडर क्षेत्र में लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। इसकी वजह से नलकूप और सबमर्सिबल पंप सुचारू रूप से नहीं चल पाते, जिससे धान जैसी संवेदनशील फसलें सूखने और बर्बाद होने के कगार पर पहुंच रही हैं।
इस पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिशासी अभियंता नलकूप को निर्देशित किया कि किसी भी नलकूप के खराब होने की सूचना मिलते ही तत्काल मरम्मत सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। वहीं, विद्युत विभाग की लापरवाही पर जिलाधिकारी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मौके पर जांच न करने और पिछली बैठक में प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से न लेने पर अधिशासी अभियंता विद्युत का वेतन रोकने और कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि सभी लंबित शिकायतों का निस्तारण एक सप्ताह के भीतर किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक के दौरान किसानों ने यह भी शिकायत की कि कई जगह नहरों और नालों में कूड़ा व मलबा फेंकने से जल प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे सिंचाई कार्य प्रभावित होता है। इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल एक जांच टीम गठित करने का आदेश दिया। यह टीम संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर उन पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान सिर्फ औपचारिक बैठकों से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए गंभीर और ठोस कार्यवाही की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि कृषि विभाग, विद्युत, नलकूप, बंधी चंद्रप्रभा सहित सभी संबंधित अधिकारी तहसील और ब्लॉक स्तर पर महीने में कम से कम दो से तीन दिन किसानों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं का समाधान करें।
इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को यह भी आदेश दिया कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ा जाए और उन्हें समय-समय पर नई योजनाओं और तकनीकी नवाचारों की जानकारी दी जाए। वही फार्मर रजिस्ट्री में प्रगति संतोषजनक न होने पर जिलाधिकारी ने उप निदेशक कृषि को भी कड़े निर्देश दिए और इसे प्राथमिकता पर सुधारने को कहा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साईं, जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, अधिशासी अभियंता सहित तमाम विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, किसान दीनानाथ श्रीवास्तव, रतन सिंह, शेषनाथ, बलदाऊ सहित कई प्रगतिशील किसान भी बैठक में शामिल हुए।
किसान दिवस की यह बैठक केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें किसानों की वास्तविक समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई और जिलाधिकारी ने सख्त प्रशासनिक रवैया अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि लापरवाही और ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


















