चकबंदी विभाग की गड़बड़ियों से आक्रोशित ग्रामीणों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत की चेतावनी

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चकबंदी विभाग की गड़बड़ियों से आक्रोशित ग्रामीणों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत की चेतावनी

चंदौली : जनपद के बलुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत हरधन जुड़ा गांव के मौजा गंगापुर में चकबंदी विभाग की कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से आक्रोशित ग्रामीणों ने जमकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारियों द्वारा कुछ दबंगों के इशारे पर किसानों की जमीनों में मनमानी ढंग से फेरबदल की जा रही है, जिससे किसान मानसिक और आर्थिक रूप से त्रस्त हो गए हैं।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि उनकी पुश्तैनी जमीनों का मुलचक (मूल चक/मूल खेत) तोड़कर उसे उड़ान चक (नई जगह स्थानांतरित भूमि) में बदल दिया गया है, जबकि उनके पास पूर्व से संबंधित कागजात व दस्तावेज मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बालू वाली अनुपजाऊ जमीन और उपजाऊ कृषि भूमि की एक समान मलियत (भूमि मूल्यांकन) कर किसानों को जबरन क्षति पहुँचाई जा रही है।

ग्रामीणों ने लगाया आरोप

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि चकबंदी विभाग के कुछ अधिकारी, क्षेत्र के दबंग लोगों के दबाव में आकर योजनाबद्ध तरीके से भूमाफिया जैसा व्यवहार कर रहे हैं। इससे खेती-किसानी पर आधारित ग्रामीणों की जीविका संकट में पड़ गई है।

ग्रामीणों की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर पूरे मामले की शिकायत करेंगे। इसके साथ ही चंदौली जिले के चकबंदी विभाग के अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे।

प्रमुख ग्रामीणों ने दी आवाज

इस विरोध प्रदर्शन में राज नारायण सिंह, बद्री नाथ सिंह, अजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, शैलेन्द्र नाथ सिंह, बेचू सिंह, राम प्रवेश सिंह, नैना देवी समेत कई अन्य ग्रामीण शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में यह कहा कि अपनी पुश्तैनी जमीन को किसी भी कीमत पर यूं ही नहीं जाने देंगे।

मांगें और सवाल

मूल चक को उड़ान चक में क्यों बदला गया?

दस्तावेजों के बावजूद किसानों को न्याय क्यों नहीं मिल रहा?

उपजाऊ और अनुपजाऊ जमीन का एक जैसा मूल्यांकन किस आधार पर?

निष्कर्ष

यह मामला चकबंदी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर प्रशासन ने शीघ्र संज्ञान नहीं लिया, तो यह विवाद और भी गहराने की आशंका है। किसानों का आक्रोश सड़कों से निकलकर शासन के दरवाजे तक पहुंच चुका है — अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन इसे कितनी गंभीरता से लेता है।

“हम अपने पूर्वजों की विरासत को भ्रष्टाचार के हाथों नहीं लुटने देंगे। चाहे जो हो जाए, हम न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।” — प्रदर्शनकारी ग्रामीण