साइबर ठगी के 100 से अधिक म्यूल खातों वाले नेटवर्क का खुलासा, दो गिरफ्तार, 16 राज्यों में फैला था जाल, 17 खातों से जुड़ी 76 साइबर शिकायतों में करीब 29 लाख की ठगी का खुलासा

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साइबर ठगी के 100 से अधिक म्यूल खातों वाले नेटवर्क का खुलासा, दो गिरफ्तार, 16 राज्यों में फैला था जाल, 17 खातों से जुड़ी 76 साइबर शिकायतों में करीब 29 लाख की ठगी का खुलासा

चंदौली : जनपद में ऑनलाइन साइबर ठगी और म्यूल बैंक खातों के जरिए देशभर में धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में अलीनगर पुलिस और साइबर सेल को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त टीम ने मुगलसराय के वीआईपी गेट के पास से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क देश के 16 राज्यों तक फैला हुआ है और अब तक चिन्हित 17 म्यूल खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 76 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें करीब 29 लाख रुपये की ठगी का विवरण सामने आया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के नवादा जिले के वारिस अलीगंज थाना क्षेत्र के मीर चक निवासी नीतीश कुमार (30) और चंदौली के सकलडीहा कोट निवासी अमन शर्मा (27) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से तीन स्मार्ट मोबाइल फोन, आठ बैंक खाता विवरण दस्तावेज, पांच पासबुक, एक चेकबुक, छह डेबिट कार्ड, छह सिम कार्ड, दो कूटरचित आधार कार्ड और 650 रुपये नकद बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, 10 अगस्त की रात साइबर सेल और अलीनगर पुलिस की टीम संदिग्ध म्यूल खाताधारकों की तलाश में चकिया तिराहे के पास मौजूद थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि साइबर ठगी की रकम मंगाने और बैंक खातों के अवैध लेन-देन में शामिल गिरोह के सदस्य मुगलसराय स्थित वीआईपी गेट के पास मौजूद हैं। सूचना पर टीम ने दबिश देकर रात करीब 9:52 बजे दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

सात लाख से अधिक की साइबर ठगी से जुड़े खाते

पुलिस ने बरामद बैंक दस्तावेजों और NCRP पोर्टल का मिलान किया तो दोनों आरोपियों के पास से मिले खातों में कुल 7,20,725 रुपये की साइबर ठगी का विवरण सामने आया। नीतीश कुमार के पास मिले आठ बैंक खाता विवरणों में करीब 3,97,477 रुपये की साइबर ठगी से संबंधित लेन-देन पाया गया। वहीं अमन शर्मा के पास मिले पांच बैंक खाता विवरण और चेकबुक से करीब 3,23,248 रुपये की साइबर ठगी का विवरण सामने आया।

जांच में इन खातों का इस्तेमाल ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात, चंडीगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में लोन फ्रॉड, डिलीवरी फ्रॉड, फ्रेंचाइजी फ्रॉड और यूपीआई धोखाधड़ी की रकम मंगाने में किए जाने की बात सामने आई है।

फर्जी आधार कार्ड से छिपाते थे पहचान

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अपनी पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिए स्थानीय पते वाले एडिटेड एवं कूटरचित आधार कार्ड का इस्तेमाल करते थे। बरामद एक आधार कार्ड पर फोटो नीतीश कुमार की थी, जबकि नाम किसी अन्य व्यक्ति का दर्ज था। इसी तरह अमन शर्मा के पास मिले आधार कार्ड पर उसकी फोटो लगी थी, लेकिन नाम और पता किसी दूसरे व्यक्ति का अंकित था।

पुलिस के अनुसार अमन शर्मा लोगों के नाम से और स्वयं के नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाकर उनकी पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड और सिम कार्ड हासिल करता था। इसके बाद नीतीश कुमार इन बैंकिंग दस्तावेजों और खातों की जानकारी बिहार के नवादा निवासी सोनू सिंह तक पहुंचाता था। पुलिस को आशंका है कि सोनू सिंह ही इस नेटवर्क को आगे संचालित करता था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम प्रयास कर रही है।

लोन, डिलीवरी और निवेश के नाम पर ठगी

जांच में पता चला है कि गिरोह विभिन्न राज्यों के लोगों को बजाज फाइनेंस के नाम पर लोन दिलाने, Meesho डिलीवरी पार्सल भुगतान, फेसबुक विज्ञापन, पार्ट-टाइम नौकरी और निवेश का झांसा देकर ऑनलाइन ठगी करता था। ठगी की रकम अलग-अलग म्यूल खातों में मंगाकर आगे ट्रांसफर की जाती थी।

अलीनगर थाने में मामले में बीएनएस की संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जांच कर रही है। इससे पहले 10 अगस्त को चंदौली पुलिस और साइबर टीम ने इसी तरह के ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से पासबुक, कूटरचित आधार कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए थे।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, म्यूल खातों के पूरे नेटवर्क की जांच कर ठगी की रकम के लेन-देन और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।