वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम, सावन में सम्पन्न हुआ भव्य साप्ताहिक यज्ञ
चंदौली : सावन मास के पावन अवसर पर रविवार को सकलडीहा स्थित गायत्री चेतना केंद्र में साप्ताहिक यज्ञ श्रद्धा, उत्साह और वैदिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं तथा विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रजनंदिनी कॉन्वेंट ग्रुप ऑफ स्कूल के निदेशक डॉ. अखिलेश अग्रहरि रहे। उनके साथ ब्रजनंदिनी कॉन्वेंट स्कूल, सकलडीहा शाखा के प्राचार्य आशुतोष त्रिपाठी एवं विद्यालय के शिक्षक भी उपस्थित रहे। गायत्री चेतना केंद्र के प्रवेश द्वार पर तिलक-चंदन, पुष्पगुच्छ एवं गायत्री मंत्र पट्टिका भेंट कर मुख्य अतिथि का आत्मीय स्वागत किया गया।
इसके बाद देवावाहन, देवपूजन, सामूहिक गायत्री मंत्र जप एवं वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने पूर्ण आस्था के साथ आहुतियां अर्पित करते हुए राष्ट्र, समाज और समस्त विश्व के कल्याण की मंगलकामना की।
यज्ञ के उपरांत डॉ. अखिलेश अग्रहरि को अक्षय कलश, परम पूज्य गुरुदेव का साहित्य एवं शिशु पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गायत्री चेतना केंद्र में प्राप्त दिव्यता, आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मीय वातावरण ने उन्हें भावविभोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि वेद, पुराण और उपनिषद मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने तथा संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देते हैं। यज्ञीय परंपरा केवल आध्यात्मिक साधना ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सशक्त बनाने का माध्यम भी है।
उन्होंने सनातन वैदिक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में गायत्री परिवार और ऋषि परंपरा के योगदान की सराहना करते हुए स्वयं को इस परिवार का सदस्य मानने पर गर्व व्यक्त किया। इस अवसर पर ब्रजनंदिनी कॉन्वेंट स्कूल के प्राचार्य आशुतोष त्रिपाठी को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में गायत्री परिवार के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं डॉ. रमाशंकर वर्मा, रामप्रसाद पाठक, दीपक श्रीवास्तव, विकल विजय सवाल, गुरुदयाल मिश्रा, डॉ. अरुण मिश्रा, राजेश चौरसिया, देवेंद्र मौर्य, शिवम पांडेय, आयुष पांडेय, जय हनुमान पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन व्यासपीठ से अवधेश मिश्रा एवं प्रज्ञेश्वर जी ने संयुक्त रूप से किया। समापन पर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने नियमित साप्ताहिक यज्ञ एवं आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागिता का संकल्प लिया।


















