बाबा कीनाराम मठ गेट पर महीनों से खराब हाईमास्ट लाइट, श्रद्धालुओं ने किया प्रदर्शन

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बाबा कीनाराम मठ गेट पर महीनों से खराब हाईमास्ट लाइट, श्रद्धालुओं ने किया प्रदर्शन

चंदौली : चहनियां ब्लॉक के रामगढ़ स्थित प्रसिद्ध संत बाबा कीनाराम जी की जन्मस्थली पर स्थित मठ के मुख्य द्वार पर लगा हाईमास्ट लाइट बीते कई महीनों से खराब पड़ा है, जिससे रात्रि के समय मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं की परेशानी तब और बढ़ जाती है जब मुख्य गेट के आसपास घना अंधेरा छा जाता है। इससे नाराज होकर सोमवार की शाम श्रद्धालुओं ने मठ गेट पर प्रदर्शन कर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को चेताया।

पूर्व सांसद डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय के निधि से लगी थी लाइट

बताया गया कि उक्त हाईमास्ट लाइट पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय के सांसद निधि से मठ परिसर की सुविधा हेतु लगाया गया था। इसका उद्देश्य मठ परिसर और मुख्य द्वार क्षेत्र में रात के समय भी पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना था, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में कोई कठिनाई न हो। परंतु अफसोस की बात यह है कि यह हाईमास्ट लाइट कई महीनों से बंद पड़ी है और अब तक उसकी मरम्मत के लिए कोई पहल नहीं की गई।

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

प्रदर्शन कर रहे श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा कीनाराम की यह जन्मस्थली करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहाँ प्रतिदिन दूर-दराज से लोग दर्शन पूजन के लिए आते हैं, परंतु अंधेरे के कारण उन्हें परेशानी होती है। श्रद्धालुओं का कहना था कि यह लाइट खराब होने के बावजूद जिम्मेदार लोग आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द हाईमास्ट लाइट को दुरुस्त नहीं कराया गया तो उन्हें धरने पर बैठने को मजबूर होना पड़ेगा।

इस दौरान प्रदर्शन में श्याम सदन गोंड, अखिलेश खरवार, मुन्ना खरवार, पाचु प्रजापति, जवाहिर गुप्ता, सेचु गुप्ता, शिवराति राम, पीयूष कुमार, अशोक कुमार, पार्वती देवी सहित कई स्थानीय श्रद्धालु मौजूद रहे।

श्रद्धालुओं की यह मांग केवल प्रकाश व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका यह भी कहना था कि मठ परिसर की समग्र देखरेख और सुविधाओं का जिम्मा स्थानीय प्रशासन को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि बाबा कीनाराम न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि यह स्थल चंदौली जनपद की पहचान भी है।

अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग और अधिकारी श्रद्धालुओं की आवाज को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जल्द कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।