दिल्ली विश्वविद्यालय में गूंजेगी गिरमिटिया इतिहास की आवाज, स्थापित हुई भारतीय प्रवासी शोधपीठ

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दिल्ली विश्वविद्यालय में गूंजेगी गिरमिटिया इतिहास की आवाज, स्थापित हुई भारतीय प्रवासी शोधपीठ

चंदौली : भारतीय प्रवासी समाज, विशेषकर गिरमिटिया समुदाय के इतिहास, संस्कृति और विरासत के अध्ययन को नई दिशा देने की पहल करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में “गिरमिटिया अध्ययन एवं भारतीय प्रवासी शोधपीठ” (Girmitiya Studies and Indian Diaspora Research Chair) की स्थापना की गई है। यह शोधपीठ महाविद्यालय और ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल के मध्य हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत प्रारंभिक रूप से पांच वर्षों के लिए स्थापित की गई है।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. लता शर्मा ने कहा कि यह शोधपीठ भारतीय प्रवासी समुदाय, विशेषकर गिरमिटिया समाज के इतिहास, संस्कृति, विरासत और समकालीन चुनौतियों के अध्ययन एवं अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल भारतीयता के वैश्विक आयामों को समझने और विश्वभर में बसे भारतीय मूल के समुदायों के साथ शैक्षिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल के संस्थापक अरविंद पाण्डेय ने इसे गिरमिटिया समाज के अध्ययन और शोध के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक एवं दूरगामी कदम बताया। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में शोधपीठ के संसाधनों को और सशक्त करते हुए शोध, नवाचार, इंटर्नशिप तथा वैश्विक सहभागिता से जुड़ी गतिविधियों को गति दी जाएगी। इसके माध्यम से गिरमिटिया वंशजों के मूल, उनकी संघर्षगाथा, उपलब्धियों और प्रेरणादायी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।

शोधपीठ के निदेशक एवं समन्वयक डॉ. सुनील कुमार मिश्र, सहायक प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, ने बताया कि इस शोधपीठ के माध्यम से गिरमिटिया एवं भारतीय प्रवासी समुदायों पर बहु-विषयक शोध, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां, व्याख्यानमालाएं, शोध परियोजनाएं, प्रकाशन, अभिलेखीकरण तथा डिजिटल रिपॉजिटरी निर्माण जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अध्ययन एवं अनुसंधान के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

शोधपीठ की संचालन समिति में अभिषेक भास्कर (सहायक प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग), डॉ. विनय कुमार मिश्र (सहायक प्रोफेसर, संगीत विभाग), भावना सक्सेना (सहायक निदेशक, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय), प्रांजल पाण्डेय (संस्थापक सदस्य, ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल) तथा डॉ. प्रमिला (विशेष आमंत्रित सदस्य) शामिल हैं।

यह शोधपीठ देश-विदेश के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों के साथ सहयोगात्मक शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ गिरमिटिया विरासत के संरक्षण, प्रलेखन और वैश्विक स्तर पर उसके प्रचार-प्रसार का कार्य करेगी। महाविद्यालय एवं ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल ने विश्वास व्यक्त किया है कि यह पहल भारतीय प्रवासी अध्ययन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी तथा भारत और विश्व के भारतीय मूल के समुदायों के बीच ज्ञान, संस्कृति और अनुसंधान के नए सेतु स्थापित करेगी।