गांवों की जर्जर सड़कें बनी चुनावी मुद्दा, प्रदर्शन में गूंजा नाराजगी का स्वर, अबकी बार सड़क नहीं तो वोट नहीं की चेतावनी
चंदौली : चहनियां क्षेत्र के अंतर्गत महमदपुर जाने वाले मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग पूरी न होने पर रविवार को ग्रामीणों ने बैनर और पोस्टर लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाते हुए ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक किसी भी नेता को गांव से वोट नहीं मिलेगा।
6 हजार की आबादी वाले गांव की जर्जर राहें
महमदपुर और जमालपुर की लगभग 6 हजार की आबादी अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां पहुंचने के लिए ग्रामीणों को हसनपुर से होकर करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन उस मार्ग की हालत बेहद खराब है। गांव में आज भी आने-जाने के लिए ईंट के चकरोड का इस्तेमाल करना पड़ता है, जो काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुका है। बरसात के दिनों में तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
जनप्रतिनिधियों से कई बार लगाई गुहार, पर सुनवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग को बनाने के लिए उन्होंने कई बार प्रस्ताव रखा और जनप्रतिनिधियों से गुहार भी लगाई, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। यह सड़क दर्जनों गांवों को जोड़ती है। हसनपुर से होकर तीरगांवा, महमदपुर, सरौली, टांडा, सोनबरसा सहित कई गांवों के लोग इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं।
यह मार्ग महज तीन किलोमीटर लंबा है, जो सीधे मुख्य सड़क से जुड़ता है, लेकिन सड़क की जर्जर हालत के कारण लोगों को मजबूरी में सात किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। लोक निर्माण विभाग ने हसनपुर प्राथमिक विद्यालय से केवल एक किलोमीटर तक तीरगांवा बॉर्डर तक सड़क बनाई है, उसके आगे अब भी क्षतिग्रस्त ईंट का चकरोड ही है।
सांसद पर टूटा आक्रोश – वादे भूले, जनता नाराज
ग्रामीणों ने बताया कि लोकसभा चुनाव के समय सांसद वीरेंद्र सिंह ने वादा किया था कि चुनाव जीतने के बाद इस मार्ग का निर्माण करवाया जाएगा। क्योंकि जमालपुर का बूथ लोकसभा क्षेत्र का “नंबर-1 बूथ” माना जाता है और यहां से ही लोकसभा चुनाव की “स्टार्टिंग” होती है। लेकिन चुनाव जीतने के बाद सांसद कभी गांव की सुध लेने भी नहीं आए।
ग्रामीणों ने प्रदर्शन के दौरान बैनर पर सांसद और विधायक के खिलाफ नाराजगी जताते हुए “सांसद-विधायक लापता” लिखकर गांव में भ्रमण किया। उनका कहना है कि नेताओं ने सिर्फ चुनाव के समय वादे किए, लेकिन काम के नाम पर कुछ नहीं किया।
“रोड नहीं तो वोट नहीं” – ग्रामीणों की खुली चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर जल्द सड़क नहीं बनाई गई, तो आने वाले चुनाव में गांव के लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि यह मार्ग उनके लिए गाजीपुर और अन्य स्थानों तक पहुंचने का सबसे नजदीकी और सुगम रास्ता है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। इनमें चंद्रमा यादव, हीरा, फौजी, वीरेंद्र, अवनीश, रामजस, विनय, रवीश, संतोष, अशोक, डब्लू, राकेश, सुरेंद्र, राहुल, दुर्गेश, अजीत सहित कई लोग मौजूद थे। ग्रामीणों ने एकजुट होकर सरकार और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
महमदपुर मार्ग की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों को आक्रोशित कर दिया है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग पूरी न होने और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से नाराज ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे के साथ प्रदर्शन करके उन्होंने साफ संदेश दे दिया है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई, तो आने वाले चुनावों में नेता वोट की उम्मीद न रखें।
यह आंदोलन सिर्फ महमदपुर की सड़क का नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और सरकारी जवाबदेही का सवाल बन चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि कब तक इस मुद्दे पर चुप रहते हैं या फिर ग्रामीणों की आवाज़ को सुनकर ठोस कदम उठाते हैं।


















