चंदौली के शुभम पाण्डेय बने भू-वैज्ञानिक, यूपीएससी में 18वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान

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चंदौली के शुभम पाण्डेय बने भू-वैज्ञानिक, यूपीएससी में 18वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान

चंदौली : जिले के चहनियाँ क्षेत्र के ग्राम रामगढ़ निवासी शुभम पाण्डेय ने अपनी प्रतिभा, लगन और परिश्रम के बल पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सेंट्रल जियोलॉजिकल सर्विस परीक्षा-2025 में ऑल इंडिया 18वीं रैंक हासिल कर पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। शुभम की इस सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गर्व और खुशी से भर दिया है। शुभम पाण्डेय का चयन केंद्रीय भूजल बोर्ड (Central Ground Water Board) में Scientist-B (ग्रेड-ए पद) पर हुआ है, जो एक प्रतिष्ठित केंद्रीय सेवा मानी जाती है। इस नियुक्ति के साथ शुभम अब देश के भूजल प्रबंधन और भू-विज्ञान से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाएंगे।

शिक्षा और उपलब्धियाँ

शुभम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव के समीप एक प्राइवेट स्कूल से हाईस्कूल तक पूरी की। इसके बाद उन्होंने वाराणसी के एक कॉन्वेंट स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे की उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का रुख किया, जहाँ से उन्होंने बीएससी (2019–22) और एमएससी (2022–24) की पढ़ाई पूरी की।

एमएससी के दौरान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विश्वविद्यालय ने उन्हें 2024 में स्वर्ण पदक (Gold Medal) से सम्मानित किया। शुभम ने प्रो. उमाकांत शुक्ला के निर्देशन में एमएससी के पश्चात नेट-जेआरएफ (NET-JRF) भी उत्तीर्ण किया और अब शोध कार्य में संलग्न हैं।

परिवार और प्रेरणा

शुभम के पिता रामगोपाल पाण्डेय एक प्रतिष्ठित किसान हैं, जबकि उनके अभिभावक कृष्णगोपाल पाण्डेय ने हमेशा शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रेरणा दी। परिवार का कहना है कि शुभम बचपन से ही मेधावी, अनुशासित और जिज्ञासु स्वभाव के रहे हैं। उन्हें विज्ञान विषयों, विशेषकर भूविज्ञान में गहरी रुचि थी।

गाँव में खुशी की लहर

शुभम के चयन की खबर जैसे ही गाँव पहुँची, रामगढ़ और आस-पास के इलाकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाई देने वालों का तांता शुभम के घर पर लग गया। ग्रामीणों ने मिठाइयाँ बाँटीं और परिवार को बधाई दी। शुभम के गार्जियन कृष्णगोपाल पाण्डेय से मिलने सैकड़ों शुभचिंतक पहुँचे और इस उपलब्धि पर गर्व जताया।

कृष्णगोपाल पाण्डेय ने कहा, “शुभम ने परिवार ही नहीं, पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। यह सफलता उनके समर्पण और मेहनत की पहचान है। हमें गर्व है कि हमारे गाँव का बेटा अब देश की सेवा एक वैज्ञानिक के रूप में करेगा।”

शुभम का संदेश

अपनी सफलता पर शुभम ने कहा “यह उपलब्धि मेरे माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों के सहयोग से संभव हुई है। मैं चाहता हूँ कि गाँव के बच्चे भी बड़े सपने देखें और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर मेहनत करें। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और लगन सच्ची हो, तो सफलता अवश्य मिलती है।”

निष्कर्ष

शुभम पाण्डेय की यह उपलब्धि चंदौली जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में टॉप रैंक लाना न केवल व्यक्तिगत सफलता है बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।

चंदौली का यह युवा भू-वैज्ञानिक अब देश की धरती के भीतर छिपे जल और खनिज संसाधनों को समझने और सुरक्षित रखने की दिशा में अपनी भूमिका निभाएगा और यही है असली “धरती पुत्र” की पहचान।