टांडा-कैथी घाट पर नाविकों की मनमानी से यात्रियों में आक्रोश, निःशुल्क सेवा के दावे पर उठे सवाल
चंदौली : बलुआ थाना क्षेत्र के टांडा-कैथी घाट पर गंगा नदी में स्थापित पीपा पुल हटाए जाने के बाद यात्रियों के आवागमन के लिए संचालित की जा रही नौका सेवा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से जहां घाट पर यात्रियों के लिए निःशुल्क नाव सेवा उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, वहीं स्थानीय लोगों ने नाविकों पर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय के प्रयासों से वर्ष 2021 में टांडा और कैथी के बीच गंगा नदी पर पीपा (प्लांटून) पुल का निर्माण कराया गया था। यह पुल क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन बना हुआ है। प्रत्येक वर्ष बरसात और संभावित बाढ़ को देखते हुए 15 जून को पुल को हटा लिया जाता है। पुल हटने के बाद लोक निर्माण विभाग द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए चार नावों का संचालन कराया जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाव सेवा के निःशुल्क होने के बावजूद नाविक यात्रियों से 20 से 30 रुपये तक की वसूली कर रहे हैं। टांडा कला बाजार निवासी एवं भाजयुमो जिला मंत्री चन्दन जायसवाल ने बताया कि नाविक खुलेआम किराया मांग रहे हैं। विरोध करने या पैसे देने से इनकार करने पर यात्रियों से अभद्रता और विवाद भी किया जा रहा है।
वहीं बाजार निवासी पियूष जायसवाल का कहना है कि नाविकों की इस मनमानी के कारण घाट से आने-जाने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है। इसका सीधा असर टांडा कला बाजार के व्यापार पर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषी नाविकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों का कहना है कि यदि विभाग द्वारा वास्तव में निःशुल्क सेवा संचालित की जा रही है तो घाट पर स्पष्ट सूचना पट्ट लगाकर किराया वसूली पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही नियमित निगरानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस संबंध में घाट दरोगा दीनानाथ सिंह ने बताया कि नाविकों द्वारा खर्च आदि के नाम पर 10 रुपये लिए जाने की जानकारी है। हालांकि 20 से 30 रुपये वसूले जाने की शिकायत उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
निःशुल्क सेवा के सरकारी दावों और यात्रियों से कथित वसूली के आरोपों के बीच अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करे ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और घाट पर आवागमन सुचारु रूप से चलता रहे।


















