आर्थिक तंगी ने ली वृद्ध की जान, जुड़ा खास गांव में बबूल के पेड़ से लटकता मिला वृद्ध का शव, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

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आर्थिक तंगी ने ली वृद्ध की जान, जुड़ा खास गांव में बबूल के पेड़ से लटकता मिला वृद्ध का शव, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

चंदौली : बलुआ थाना क्षेत्र के जुड़ा खास गांव में शुक्रवार की सुबह एक बेहद मार्मिक और हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। आर्थिक तंगी, बदहाली और जीवन की कठिन परिस्थितियों से टूट चुके 60 वर्षीय वृद्ध रामदुलारे राजभर ने बबूल के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही गांव में सनसनी फैल गई और परिजनों में कोहराम मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जुड़ा खास गांव निवासी रामदुलारे राजभर गुरुवार की रात रोज़ की तरह भोजन करने के बाद नारेपार ताल स्थित पंपसेट पर सोने के लिए गए थे। देर रात वह पास ही स्थित एक बबूल के पेड़ के पास पहुंचे, अपने जूते नीचे उतारे, पेड़ पर चढ़कर रस्सी का फंदा बनाया और डाल से लटक गए। शुक्रवार की सुबह जब ग्रामीण ताल की ओर गए तो पेड़ से लटकता शव देखकर उनके होश उड़ गए। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

ग्रामीणों के अनुसार, रामदुलारे की पारिवारिक स्थिति बेहद दयनीय थी। उनके पास न तो खुद की खेती की जमीन थी और न ही रहने के लिए पक्का मकान। वह एक पंपसेट परिसर में रहकर उन्हीं की जमीन पर अधिया (साझेदारी) पर खेती कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। सीमित संसाधनों और लगातार बढ़ती आर्थिक परेशानियों के कारण वह लंबे समय से मानसिक तनाव में बताए जा रहे थे।

घटना की सूचना मिलते ही महुवर कला चौकी प्रभारी प्रमोद सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को पेड़ से उतरवाया और कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है और अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

इस दुखद घटना के बाद मृतक के परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी बैजंती देवी, पुत्र सन्नी देवल और बाबी देवल का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों की चीख-पुकार से गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है।

यह घटना एक बार फिर ग्रामीण अंचलों में गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक संकट की भयावह सच्चाई को उजागर करती है, जहाँ मजबूर हालात इंसान को इस हद तक तोड़ देते हैं कि वह जीवन समाप्त करने जैसा कठोर कदम उठा लेता है।