ईंट भट्ठा संचालकों ने पीएम से लगाई न्याय की गुहार, बढ़े टैक्स से उद्योग पर संकट
चंदौली : ईंट निर्माता समिति चंदौली ने प्रेसवार्ता कर सरकार से जीएसटी में सुधार की मांग उठाई। समिति ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लालकिले से दिए अपने संबोधन में देश की जनता से वादा किया था कि आने वाले त्योहारों पर ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिससे जनता सस्ता सामान खरीद सके और त्योहार धूमधाम से मना सके। किंतु वर्तमान टैक्स व्यवस्था ईंट उद्योग के लिए बोझ बन गई है, जिससे ईंट महंगी होती जा रही है और सस्ती दर पर घर बनाने का आमजन का सपना अधूरा हो रहा है। महामंत्री रतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उम्मीद है कि सरकार ईंट उद्योग से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर न्याय करेगी।
जीएसटी स्लैब में गड़बड़ी
समिति ने बताया कि जीएसटी लागू करते समय इसे “वन नेशन वन टैक्स” कहा गया था, लेकिन शुरू से ही ईंट उद्योग पर यह व्यवस्था न्यायपूर्ण ढंग से लागू नहीं हुई। 5%, 12% और 28% स्लैब को समाप्त कर केवल 5%, 18% और 28% रखने का निर्णय लिया गया। तीनों को मिलाने पर टैक्स बोझ 63% तक जा पहुंचा है। विशेष स्कीम के अंतर्गत ईंट उद्योग के लिए 5% और 6% स्लैब तो रखा गया, लेकिन IT CLAIM करने वालों को 12% टैक्स देना पड़ता है। वहीं, कई जगह पर अभी भी 6% और 12% की व्यवस्था बनी हुई है, जिससे उद्योग संचालक असमंजस में हैं।
कोयले पर सबसे बड़ा बोझ
उन्होंने बताया कि ईंट निर्माण का मुख्य ईंधन कोयला है, जिस पर जीएसटी पहले 5% थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 18% कर दिया गया। इससे उत्पादन लागत में सीधा-सीधा इजाफा हुआ है। पहले कोलरी से आने वाले कोयले पर जितना भाड़ा लगता था, अब उस पर भी 18% जीएसटी जुड़ जाने से भाड़ा भी महंगा हो गया है।
छोटे उद्योगों पर मार
समिति ने कहा कि ईंट उद्योग ग्रामीण और गरीब तबके से जुड़ा हुआ है। गांवों में अधिकांश ग्राहक किसान और मजदूर हैं। बढ़े टैक्स का बोझ आखिरकार इन्हीं उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री की “सबको आवास” योजना भी टैक्स बोझ की वजह से प्रभावित हो रही है। “अगर टैक्स बढ़ेगा तो सस्ती ईंटें मिलना संभव नहीं होगा और गरीब वर्ग का घर बनाने का सपना टूट जाएगा,” समिति पदाधिकारियों ने कहा।
ईंट उद्योग को लग रहा डबल टैक्स
समिति ने बताया कि निर्माण कार्य में अब लाल ईंटों की जगह आरसीसी, पक्के ब्लॉक और इंटरलॉकिंग ईंटों का उपयोग बढ़ता जा रहा है। जहां पहले सरकारी परियोजनाओं में लाल ईंटों की मांग थी, अब वहाँ कंक्रीट ब्लॉकों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे ईंट उद्योग पहले से ही संकट झेल रहा है और अब टैक्स की मार ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
सरकार से न्याय की गुहार
प्रेसवार्ता में समिति पदाधिकारियों ने कहा कि उद्योग पहले से ही मंदी झेल रहा है। टैक्स का यह बोझ न केवल ईंट भट्ठा संचालकों को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि आम उपभोक्ता भी महंगाई की मार झेल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि जीएसटी की समीक्षा कर ईंट उद्योग को राहत प्रदान करें, ताकि यह परंपरागत उद्योग बच सके और गरीबों को सस्ती ईंटें उपलब्ध हो सकें।
कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारी
प्रेसवार्ता में समिति अध्यक्ष राम गोपाल सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओ.पी. सिंह, कोषाध्यक्ष शिव कुमार मौर्य, संयुक्त मंत्री अशोक सिंह एवं संतोष तिवारी, कल्लन सिंह, राजन सिंह समेत अनेक पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
















