सिंगहा गांव में नाली निर्माण को लेकर ग्रामीणों का हंगामा, सड़क निर्माण कार्य रोका, धरना-प्रदर्शन कर जताया विरोध

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सिंगहा गांव में नाली निर्माण को लेकर ग्रामीणों का हंगामा, सड़क निर्माण कार्य रोका, धरना-प्रदर्शन कर जताया विरोध

चंदौली : चहनियां क्षेत्र अंतर्गत सिंगहा गांव में हाईवे निर्माण के दौरान नाली न बनाए जाने से नाराज़ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यदायी संस्था द्वारा सड़क निर्माण का कार्य बिना नाली निर्माण के शुरू कर दिए जाने से आक्रोशित ग्रामीणों ने बुधवार को कार्य रोकते हुए सड़क पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से कुछ समय के लिए चंदौली-चहनियां-तीरगांवा मार्ग बाधित हो गया, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।

घटना की सूचना मिलते ही कार्यदायी संस्था के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। संस्था की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि सड़क निर्माण के साथ-साथ नाली का निर्माण कार्य भी कराया जाएगा, तब जाकर ग्रामीण शांत हुए और धरना समाप्त किया।

ग्रामीणों का आरोप, बिना नाली के बन रही है सड़क, बरसात में होगा बड़ा संकट

ग्रामीणों ने बताया कि सिंगहा गांव हाईवे किनारे बसा हुआ है, जहां पचासों परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। हाईवे निर्माण के चलते यदि नाली का निर्माण नहीं किया गया तो बरसात के दिनों में न केवल सड़क का पानी गांव में घुसेगा, बल्कि घरों में जलभराव की भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

ग्रामीणों ने कहा कि जब मिट्टी भराई का कार्य चल रहा था, तभी 20 जून 2025 को उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग के मुख्य अभियंता को पत्रक सौंपकर नाली निर्माण की मांग की थी। बावजूद इसके उनकी मांगों को नजरअंदाज कर सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। जब ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुंचे कर्मियों से नाली के संबंध में सवाल किया, तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल नाली निर्माण की कोई योजना नहीं है। इसी बात से नाराज होकर ग्रामीणों ने कार्य रुकवाकर सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

नाली नहीं बनी तो फिर से चक्का जाम की चेतावनी

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जल्द ही नाली निर्माण का कार्य नहीं शुरू हुआ, तो वे दोबारा बड़े स्तर पर चक्का जाम करेंगे और कार्यदायी संस्था की मनमानी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी तरह की आपदा या परेशानी न हो।

प्रशासन और विभाग पर उठे सवाल

यह घटना न केवल कार्यदायी संस्था की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि प्रशासन और निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। विकास कार्यों के दौरान यदि स्थानीय जनहित की अनदेखी की जाती है, तो उसका विरोध होना स्वाभाविक है।

फिलहाल आश्वासन के बाद मामला शांत हो गया है, लेकिन ग्रामीणों की आंखें अब इस बात पर टिकी हैं कि कब और कैसे नाली निर्माण का कार्य शुरू होता है। यदि आश्वासन को अमल में नहीं बदला गया, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा और उग्र रूप ले सकता है।