विद्यालय खुलते ही शिक्षा जागरूकता रैली का आयोजन, बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को किया गया प्रेरित
चंदौली : ग्रीष्मावकाश की समाप्ति के बाद जैसे ही स्कूलों में रौनक लौटी, उसी के साथ जनपद चंदौली में शिक्षा विभाग ने एक प्रेरणादायक पहल की। सोमवार को जिले के नगर क्षेत्र में स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत शिक्षा जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस रैली का उद्देश्य था अभिभावकों को प्रेरित करना कि वे अपने बच्चों को विद्यालय भेजें और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें।
हरी झंडी दिखाकर रैली को किया गया रवाना
इस जागरूकता रैली का भव्य शुभारंभ नगर पालिका कार्यालय से हुआ, जहां जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (BSA) श्री सचिन कुमार एवं खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर क्षेत्र डॉ. राजेश कुमार चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर और हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया।
शिक्षा जागरूकता रैली में गूंजे स्लोगन
रैली नगर क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से होते हुए रेलवे स्टेशन के सामने से गुजरी और कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय नगर क्षेत्र पर इसका समापन हुआ। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने हाथों में शिक्षा संबंधी जागरूकता पोस्टर और स्लोगन थाम रखे थे, जिनमें लिखा था — “हर बच्चा पढ़े, हर दिन स्कूल जाए”, “शिक्षा का दीप हर घर जलाएं” आदि।
छात्र-छात्राओं संग अफसरों ने बढ़ाया कदम
रैली में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों एवं अन्य विद्यालय स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही। पूरे मार्ग में जिला बेसिक शिक्षाधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी स्वयं छात्रों के साथ चलते रहे, जिससे उत्साह और ऊर्जा का संचार देखने को मिला।
जागरूकता रैली के जरिये अभिभावकों को किया गया प्रेरित
रैली के माध्यम से आम नागरिकों, राहगीरों और स्थानीय व्यापारियों को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा ही समाज और बच्चों का भविष्य गढ़ती है, और यह हर अभिभावक की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को समय पर स्कूल भेजें। अधिकारियों ने अपील की कि बच्चों का समय से विद्यालय में नामांकन कराएं और उनकी उपस्थिति को नियमित रखें, ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हो सके।
रैली के अंत में छात्रों को कराया गया जलपान
रैली के समापन पर छात्र-छात्राओं को जलपान कराया गया। इस अवसर पर शिक्षकों को भी निर्देशित और प्रेरित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र के अभिभावकों से निरंतर संवाद बनाए रखें, जिससे स्कूलों में नामांकन एवं उपस्थिति दर बढ़ाई जा सके।
यह आयोजन न केवल शिक्षा विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि यदि प्रशासन, शिक्षक और समाज मिलकर प्रयास करें, तो शिक्षा की अलख को जन-जन तक पहुंचाना संभव है।


















