करोड़पति बनने की दौड़ में कंगाल हो रहे युवा, Dream11 और My11Circle जैसी फैंटेसी गेम्स का बढ़ता नशा

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    करोड़पति बनने की दौड़ में कंगाल हो रहे युवा, Dream11 और My11Circle जैसी फैंटेसी गेम्स का बढ़ता नशा

    यूपी टाइम्स 18 : ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे Dream11, My11Circle, MPL और अन्य पर तेजी से बढ़ती युवा पीढ़ी की दीवानगी अब एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बनती जा रही है। करोड़पति बनने का सपना दिखाने वाले इन ऐप्स ने युवाओं को इस हद तक आकर्षित किया है कि वे अपनी पढ़ाई, नौकरी और यहां तक कि अपनी बचत तक को दांव पर लगा रहे हैं।

    ‘करोड़पति बनने का सपना’, लेकिन कर्ज में डूबने की हकीकत

    इन प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन कुछ इस तरह बनाए जाते हैं कि कोई भी आम व्यक्ति कुछ ही मिनटों में करोड़ों का मालिक बन सकता है। क्रिकेट के बड़े सितारों द्वारा प्रचारित इन विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि कैसे एक साधारण व्यक्ति एक टीम बनाकर करोड़पति बन जाता है। लेकिन ग्राउंड रियलिटी इससे बहुत अलग है।

    जानकारी के अनुसार बरेली के 24 वर्षीय रोहित वर्मा, जो एक निजी कंपनी में कार्यरत थे, अब बेरोजगार हैं और 70 हजार रुपये के कर्ज में डूबे हैं। शुरुआत में उन्होंने Dream11 पर 500 रुपये लगाए, कुछ छोटी जीत भी मिली जिससे उत्साह बढ़ा। फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा इन ऐप्स में लगाना शुरू किया, लेकिन जीत की बजाय अब उनके हाथ में सिर्फ खाली जेब और अफसोस है।

    फैंटेसी गेम या डिजिटल जुआ?

    हालांकि इन कंपनियों का दावा है कि फैंटेसी गेम ‘कौशल आधारित खेल’ हैं, लेकिन असल में ये किस्मत और अनुमान पर ज्यादा निर्भर करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये गेम एक तरह का ‘डिजिटल जुआ’ हैं, जहां जीत की संभावना बेहद कम होती है लेकिन हारने का खतरा बहुत बड़ा।

    युवाओं की मानसिकता और सामाजिक असर

    बड़े शहरों से लेकर कस्बों तक, युवा अब इन गेम्स को अपनी आमदनी का जरिया मानने लगे हैं। रात-रात भर क्रिकेट स्टैट्स खंगालना, प्लेइंग 11 बनाना और दोस्तों के साथ ग्रुप बनाकर पैसा लगाना – ये एक नई लत बनती जा रही है। इससे न केवल समय और धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि मानसिक तनाव और अवसाद के मामले भी बढ़ रहे हैं।

    सरकारी निगरानी और कानून की स्थिति

    भारत में फैंटेसी गेमिंग की वैधता अभी भी एक ग्रे एरिया में है। कुछ राज्यों ने इन पर प्रतिबंध लगाया है, जबकि कई राज्य अब भी इन्हें ‘कौशल का खेल’ मानकर चल रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इस क्षेत्र को रेगुलेट करने की सख्त जरूरत है, ताकि युवाओं को इस डिजिटल जुए से बचाया जा सके।

    करोड़पति बनने की चाहत कोई गलत बात नहीं है, लेकिन जब यह चाहत इंसान को विवेकहीन बना दे, तब वह खुद को बर्बादी की ओर धकेलता है। Dream11 और My11Circle जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आंख मूंद कर भरोसा करने से पहले युवाओं को सोचना होगा – “क्या ये सच में सपनों की सीढ़ी हैं या फिर कंगाली की खाई?”