डीएम हो तो चंद्र मोहन गर्ग जैसा! सादगी में अपनापन, फैसलों में सख्ती और कामकाज में रफ्तार ने चंदौली में बनाई अलग पहचान

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डीएम हो तो चंद्र मोहन गर्ग जैसा! सादगी में अपनापन, फैसलों में सख्ती और कामकाज में रफ्तार ने चंदौली में बनाई अलग पहचान

चंदौली : प्रशासनिक कुर्सी पर बैठना आसान है, लेकिन उस कुर्सी की जिम्मेदारियों को जनता की उम्मीदों के अनुरूप निभाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। चंदौली के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग का कार्यकाल इसी फर्क की कहानी बयां करता है। 16 अप्रैल 2025 को चंदौली के जिलाधिकारी का पदभार संभालने के बाद से उन्होंने जिस सक्रियता, सहजता और सख्त प्रशासनिक तेवर के साथ जिले की कमान संभाली है, उसने लोगों के बीच उनकी एक अलग पहचान बनाई है। यही वजह है कि आम लोगों की जुबान पर एक बात सुनने को मिलती है – “डीएम हो तो चंद्र मोहन गर्ग जैसा।”

जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद से गर्ग लगातार जिले की जमीनी हकीकत को करीब से समझने पर जोर देते रहे हैं। विकास कार्यों की प्रगति हो, जल निकासी की समस्या हो, ब्लॉक कार्यालयों की कार्यप्रणाली हो या सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन – वे कागजों तक सीमित रहने के बजाय मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की पड़ताल करने के लिए जाने जाते हैं।

दफ्तर में समय की पाबंदी, जनता के लिए दरवाजे खुले

चंद्र मोहन गर्ग की कार्यशैली का एक अहम पहलू उनकी समयबद्धता है। वे नियमित रूप से समय से कार्यालय पहुंचकर प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करते हैं। जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से अपनी फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों की समस्याओं को सुनना उनकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फरियादियों की बात सुनने के बाद संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देकर समस्याओं के त्वरित निस्तारण का प्रयास किया जाता है।

जनता के बीच उनकी सबसे बड़ी खूबियों में उनकी सरलता और सहज व्यवहार को माना जाता है। प्रशासनिक पद की गंभीरता के बावजूद आम आदमी से संवाद करते समय उनका सहज रवैया लोगों को अपनी बात खुलकर रखने का भरोसा देता है।

लापरवाही पर नरमी नहीं, काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं

जहां एक ओर उनका व्यवहार सहज है, वहीं सरकारी कामकाज में लापरवाही को लेकर उनका रुख सख्त माना जाता है। अधिकारियों और कर्मचारियों को शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने, विकास कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने के निर्देश दिए जाते हैं। निरीक्षण के दौरान खामियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों को चेतावनी और सुधार के निर्देश देने में भी वे पीछे नहीं हटते। यही “व्यवहार में सरलता और काम में सख्ती” वाली कार्यशैली उन्हें प्रशासनिक गलियारों में अलग पहचान देती है।

धान-गेहूं खरीद और खाद व्यवस्था पर पैनी नजर

कृषि प्रधान चंदौली में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी जिलाधिकारी की सक्रियता देखने को मिलती है। धान-गेहूं खरीद व्यवस्था और खाद की उपलब्धता को लेकर वे विशेष रूप से गंभीर रहते हैं। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सरकारी व्यवस्था का लाभ सही लोगों तक पहुंचे, इसके लिए संबंधित विभागों को लगातार निर्देशित किया जाता है।

जल निकासी से लेकर विकास कार्यों तक, जमीन पर दिखता है प्रशासन

बरसात के मौसम में जलभराव और जल निकासी जैसी समस्याएं चंदौली के कई इलाकों के लिए चुनौती बनती हैं। ऐसे मामलों में जिलाधिकारी स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हैं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देते हैं। ब्लॉक कार्यालयों के निरीक्षण से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं की स्थिति तक, उनकी कार्यशैली में लगातार जमीनी निगरानी दिखाई देती है।

उनकी कोशिश यही रहती है कि सरकारी योजनाएं फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई दें और आम जनता को उनका वास्तविक लाभ मिले।

आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई, प्रशासन में अलग अंदाज

25 सितंबर 1990 को जन्मे चंद्र मोहन गर्ग भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2016 बैच के अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश कैडर से जुड़े हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की शिक्षा प्राप्त की है। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए वे वर्तमान में चंदौली के जिलाधिकारी एवं कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 16 अप्रैल 2025 को चंदौली के डीएम का पदभार ग्रहण किया।

तकनीकी शिक्षा और प्रशासनिक अनुभव का यह मेल उनकी कार्यशैली में भी दिखाई देता है – समस्या की पहचान, मौके पर पड़ताल और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही।

जनता के बीच बन रही अलग छवि

किसी भी जिलाधिकारी की असली पहचान सरकारी फाइलों से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसकी कार्यशैली से बनती है। चंद्र मोहन गर्ग के मामले में भी उनकी सहजता, नियमित निरीक्षण, समयबद्ध कार्यशैली और लापरवाही के प्रति सख्त रवैये ने उन्हें चर्चा में रखा है।

चंदौली की जनता के लिए जिलाधिकारी का पद केवल एक प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान की उम्मीद का केंद्र होता है। ऐसे में जब जिले का मुखिया खुद समस्याओं को समझने के लिए मैदान में उतरता है, फरियादियों की बात सुनता है और अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की कोशिश करता है, तो आम आदमी के भीतर व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत होता है।

सादगी चेहरे पर, संवेदनशीलता व्यवहार में और प्रशासनिक फैसलों में सख्ती – चंद्र मोहन गर्ग की यही कार्यशैली आज चंदौली में उनकी पहचान बनती जा रही है। और शायद इसी भाव को सबसे सरल शब्दों में चंदौली की जनता कहती नजर आती है – “डीएम हो तो चंद्र मोहन गर्ग जैसा हो।”

रिपोर्ट : पवन पाण्डेय (UP TIMES18)