राम मंदिर पर अखिलेश के बयान पर मंत्री रविंद्र जायसवाल का पलटवार, बोले- जिनकी राम में आस्था नहीं, उन्हें राम मंदिर पर बोलने का अधिकार नहीं
चंदौली : कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री रविंद्र जायसवाल ने मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा राम मंदिर को लेकर किए गए ट्वीट पर तीखा पलटवार किया।
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि यदि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे में किसी प्रकार की चोरी या अनियमितता हुई है तो यह निश्चित रूप से अपराध है और ऐसा कृत्य किसी भी स्थिति में क्षम्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं कोई शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।
हालांकि उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में कई ऐसे धार्मिक संस्थान हैं, जिनमें जामा मस्जिद और चर्च भी शामिल हैं, जहां होने वाली आय और उसके उपयोग को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव निष्पक्ष जांच की बात करते हैं तो उन्हें उन संस्थानों की आय और उसके प्रबंधन पर भी सवाल उठाना चाहिए।
मंत्री ने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब वह स्वयं विधायक थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय प्रदेश सरकार ने केवल अल्पसंख्यक समुदाय के कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल बनवाने पर विशेष ध्यान दिया, जबकि हिंदू समाज के श्मशान घाटों और मंदिरों के विकास की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था कि विकास कार्यों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
रविंद्र जायसवाल ने कहा कि जिन लोगों की भगवान राम में आस्था नहीं है, जो राम के नाम पर राजनीति करते रहे हैं और जिन पर रामभक्तों पर गोली चलवाने जैसे आरोप लगते रहे हैं, उन्हें राम मंदिर के विषय में टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को न तो राम मंदिर की चिंता है और न ही चंदे की पारदर्शिता की, बल्कि उनका उद्देश्य केवल विशेष वर्ग की राजनीति कर अपना राजनीतिक आधार मजबूत करना है।
मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर राम मंदिर और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


















