मानदेय और सेवा सुरक्षा की मांग पर गरजे वित्तविहीन शिक्षक, कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
चंदौली : वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में गुरुवार को सैकड़ों वित्तविहीन शिक्षक एवं कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय मांगपत्र अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रतन वर्मा को सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में शिक्षकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी कई दशकों से बिना नियमित वेतन के शैक्षणिक सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर 1986 को जारी अध्यादेश में वित्तविहीन व्यवस्था को केवल दो वर्षों के लिए प्रयोगात्मक बताया गया था, लेकिन यह व्यवस्था आज तक जारी है, जिससे हजारों शिक्षक आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करने को मजबूर हैं।
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016-17 में सरकार द्वारा जीविकोपार्जन योग्य मासिक मानदेय के लिए 200 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किए जाने के बावजूद इसे मूल उद्देश्य के अनुरूप लागू नहीं किया गया। साथ ही, शासनादेश के माध्यम से ऐसी शर्तें जोड़ दी गईं, जिनसे वित्तविहीन शिक्षकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि इस मामले में शासन स्तर पर कई बार प्रत्यावेदन दिए गए और बाद में उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की गई, जिस पर 19 जुलाई 2023 को आदेश भी पारित हुआ। इसके बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से शिक्षकों में भारी नाराजगी है।
महासभा ने सरकार से वित्तविहीन शिक्षकों एवं कर्मचारियों को तत्काल जीविकोपार्जन योग्य मासिक मानदेय देने, वित्तविहीन विद्यालयों को पुनः अनुदान सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने, सेवा शर्तों का निर्धारण सुनिश्चित करने तथा चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
इस अवसर पर प्रधान महासचिव जियारत हुसैन, प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णमोहन यादव, बनवारी पाण्डेय, शशिधर चौबे, श्रीनिवास पाण्डेय, रामनिवास उपाध्याय, आजाद यादव, राजीव यादव, संतोष कुमार गुप्ता, रविन्द्र यादव, धनंजय कुमार उपाध्याय, सत्यनारायण सिंह परिहार सहित सैकड़ों शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।


















