रामगढ़ में रामलीला का भव्य समापन, श्रीराम के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब

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रामगढ़ में रामलीला का भव्य समापन, श्रीराम के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब

चंदौली : चहनिया क्षेत्र अंतर्गत रामलीला समिति रामगढ़ द्वारा आयोजित चौदह दिवसीय भव्य रामलीला मंचन का शानदार समापन शनिवार को हुआ। यह महोत्सव भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक धरोहर का अद्वितीय संगम साबित हुआ। रामलीला का अंतिम दिन अत्यंत उल्लास और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लंका पर विजय प्राप्ति के बाद भगवान श्रीराम और भरत के मिलाप का दृश्य, तथा वनवास से लौटते ही अयोध्या नगरी में खुशियों की लहर दौड़ने का भावपूर्ण मंचन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। लोगों ने फूलों की वर्षा कर, आतिशबाजी के साथ प्रभु श्रीराम के स्वागत का जश्न मनाया। दर्शकों ने मिठाइयां बांटी और पूरे परिसर को फूल मालाओं और सजावटी रंगों से सजाया गया।

इस अवसर पर वशिष्ठ और अन्य मुनियों ने भगवान श्रीराम को आशीर्वाद दिया। इसके अलावा श्रीराम ने माता कौशल्या, कैकेई और सुमित्रा से भी आशीर्वाद लिया। पूरी अयोध्या नगरी के नागरिकों और स्थानीय लोगों के अनुरोध पर क्षेत्र के पूज्य, विद्वान ब्राह्मण राजेन्द्र मिश्रा, संतोष मिश्रा, शिवदत्त पांडेय और अमृत पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राजतिलक की विधि सम्पन्न कराई।

भगवान श्रीराम की भूमिका में रामगढ़ निवासी वरिष्ठ पत्रकार सुधीन्द्र पांडेय के पुत्र शौर्य पांडेय ने विराट सिंहासन पर बैठकर राजगद्दी संभाली। उनके साथ तीनों भाई और माता जानकी का सुसज्जित मंचन हुआ। रामलीला के समापन अवसर पर हनुमान जी सहित वानर सेना का सजीव प्रस्तुतीकरण दर्शकों को बहुत भाया।

रामगढ़ की रामलीला ने अपनी भव्यता और भक्ति भाव से किसी भी अयोध्या की रामलीला को भी चुनौती दी। अंतिम दिन रामलीला में भावपूर्ण राजतिलक की लीला का गायन विजय पांडेय और मुन्ना पांडेय ने अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। दर्शकों की भारी भीड़ ने मंच और परिसर को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ भर दिया।

समिति ने सभी कलाकारों, सहयोगियों और सहभागी नागरिकों का स्मृति चिह्न व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। तत्पश्चात, उपस्थित सभी लोगों में महाप्रसाद का वितरण भी किया गया, जिससे सभी ने इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लिया।

इस मौके पर मुख्य रूप से ब्यास शोभनाथ पांडेय, धनंजय सिंह, सारनाथ पांडेय, नागेन्द्र सिंह, शिवदत्त पांडेय, डॉ. बंगाली सूतप राय, संदीप पाटिल, रविन्द्र सिंह, पप्पू माली, राजन सिंह, अकरम अली, मुहम्मद रफीक सहित दर्जनों ग्रामीण उपस्थित रहे।

रामगढ़ की रामलीला न केवल क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखती है, बल्कि युवाओं और बच्चों में धर्म, भक्ति और नैतिक मूल्यों की अलख जगाने का भी प्रेरक माध्यम बनी हुई है।