चंदौली में गूंजी जय-जय श्रीराम की ध्वनि, रामगढ़ से निकली भगवान श्रीराम की भव्य बारात

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चंदौली में गूंजी जय-जय श्रीराम की ध्वनि, रामगढ़ से निकली भगवान श्रीराम की भव्य बारात

चंदौली : श्रीरामलीला सेवा समिति रामगढ़ के तत्वावधान में चल रहे श्रीरामलीला महोत्सव के चौथे दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की बारात बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक वैभव के साथ निकाली गई। इस दिव्य अवसर पर नगरवासियों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा वातावरण राममय हो गया और जगह-जगह “जय-जय श्रीराम” और “सीता-राम” के गगनभेदी नारे गूंजते रहे।

दूल्हा बने भगवान राम, साथ चले चारों भाई

भव्य शोभायात्रा में भगवान श्रीराम दूल्हे के वेश में अलंकृत पोशाक पहनकर घोड़ी पर सवार हुए। उनके साथ भाई भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न भी सुसज्जित होकर बारात में सम्मिलित हुए। पिता राजा दशरथ, गुरु वशिष्ठ तथा नगरवासी बाराती बनकर प्रभु श्रीराम के साथ चल रहे थे। बैंड-बाजों की मधुर धुन और झांकियों की सुंदर प्रस्तुति ने बारात को और भव्य बना दिया।

नगर में हुआ पुष्पवर्षा से स्वागत

राम बारात रामलीला परिषद से प्रारंभ होकर गलियों और मोहल्लों से होती हुई अघोराचार्य महाकापालिक बाबा कीनाराम धाम तक पहुंची। मार्गभर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बारातियों का स्वागत किया। घर-घर दीपक जलाए गए, तोरण-द्वार सजाए गए और रंगोली से द्वारों को सजाकर नगरवासियों ने प्रभु श्रीराम के स्वागत की परंपरा को जीवंत किया।

जनकपुरी में रचा श्रीराम-सीता विवाह

धाम स्थल पर पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ब्राह्मणों ने श्रीराम व उनके भाइयों की पूजा-अर्चना एवं आरती की। विवाह मंच पर महाराज जनक और रानी सुनयना ने परंपरागत विधि-विधान से सीता-राम विवाह संस्कार संपन्न कराया। विवाह समारोह के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक विवाह गीत, गाली गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को मंगलमय बना दिया।

लोक परंपरा और धार्मिक उल्लास का अद्भुत संगम

विवाह पूर्ण होने के बाद देवताओं व ऋषि-मुनियों को भोजन और सगुन अर्पित करने की परंपरा निभाई गई। तत्पश्चात भगवान श्रीराम, माता सीता, चारों भाई व उनके अर्धांगिनी, गुरुजन व समस्त बाराती अवध के लिए रवाना हुए। अवध पहुंचने पर नगरवासियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं पुष्पवर्षा कर राम-सीता दंपति का भव्य स्वागत किया। पूरा नगर “सीताराम” के दिव्य जयघोष से गूंज उठा।

ग्रामवासियों की भारी उपस्थिति

इस ऐतिहासिक व धार्मिक आयोजन में धनंजय सिंह, अमृत प्रकाश सिंह, देव दत्त पांडेय, कपिल पाठक, नंदु गुप्ता, सुधिद्र पांडेय, अशोक मोर्या, मुकेश निषाद, मुलायम यादव सहित हजारों की संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे और श्रीराम विवाह की इस अलौकिक झांकी का साक्षी बने।

यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।