नागपंचमी पर ‘सर फोड़’ परंपरा को लेकर सख्त हुआ प्रशासन , ड्रोन से होगी निगरानी
चंदौली : जनपद के चहनियां क्षेत्र में नागपंचमी के दिन निभाई जाने वाली ‘सर फोड़ने’ की दिल दहला देने वाली परंपरा एक बार फिर चर्चा में है। यह परंपरा इतनी वीभत्स है कि इसके बारे में सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा को रोकने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। रविवार की शाम बलुआ थाना प्रभारी डॉ. आशीष मिश्रा ने बिसुपुर पंचायत भवन में दोनों गांवों के संभ्रांत नागरिकों संग बैठक कर इस परंपरा पर विस्तार से चर्चा की और कड़े निर्देश भी दिए।
क्या है यह परंपरा?
नागपंचमी के अवसर पर बिसुपुर और महुआरीखास गांवों में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। दिन की शुरुआत दोनों गांवों के मंदिरों में पूजा-पाठ से होती है। महिलाएं पारंपरिक कजरी गीत गाती हैं, जो देर दोपहर तक चलता है। लेकिन सांझ ढलते ही गांवों की सीमाओं पर स्थित नाले के पास एकत्रित होते हैं दोनों गांवों के पुरुष और महिलाएं। यहीं से शुरू होती है गालियों की झड़ी, जो लोक परंपरा का हिस्सा बताई जाती है। महिलाएं अश्लील गीतों और गालियों के माध्यम से पुरुषों को उकसाती हैं — और फिर शुरू होता है हिंसक संघर्ष।
दोनों ओर से लोग ईंट-पत्थर बरसाने लगते हैं। यह झड़प तब तक चलती है जब तक किसी न किसी के सिर से खून न निकल आए — यही इस परंपरा की पराकाष्ठा मानी जाती है। ग्रामीण इसे साहस और परंपरा की निशानी बताते हैं, लेकिन प्रशासन इसे एक कुप्रथा मानते हुए रोकने के प्रयास में जुट गया है।
प्रशासन की सख्ती
इस खतरनाक परंपरा को रोकने के लिए बलुआ थाना प्रभारी डॉ. आशीष मिश्रा ने दोनों गांवों के जनप्रतिनिधियों और संभ्रांत नागरिकों को साथ लेकर स्पष्ट कहा कि, “परंपराओं का पालन जरूर करें, लेकिन हिंसक परंपराओं को समाप्त करना होगा। ‘सर फोड़ने’ जैसी कुप्रथाएं आपसी बैर और वैमनस्य को जन्म देती हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने बताया कि नागपंचमी के दिन दोनों गांवों की सीमाएं सील कर दी जाएंगी। भारी पुलिस बल की तैनाती होगी और ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। जो भी हिंसा फैलाने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में ये लोग रहे मौजूद
बैठक में प्रधानपति सुदामा राम, बीडीसी प्रतिनिधि महुआरीखास, नरेंद्र गुप्ता, विंध्याचल तिवारी, महेंद्र कुमार, अरविंद सिंह, अभिषेक यादव, ओमप्रकाश, मनोज यादव, अजीत सिंह, जोखन राम सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि परंपरा का सम्मान हो, लेकिन हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
निष्कर्ष
जहां एक ओर लोक परंपराओं का संरक्षण जरूरी है, वहीं दूसरी ओर हिंसक कुप्रथाओं पर समय रहते रोक लगाना समाज की जिम्मेदारी है। प्रशासन ने इस दिशा में पहल की है — अब देखना है कि परंपरा निभेगी या एक नई सोच की शुरुआत होगी।


















