संगम में डुबकी लगाएगी योगी सरकार, दूसरी बार कुंभ में करेगी कैबिनेट मीटिंग, विधानमंडल की भी होगी बैठक
लखनऊ : महाकुंभ मेला में पूरी योगी सरकार संगम में डुबकी लगाएगी और जनकल्याण की कामना करेगी. इसके बाद सरकार संगम के किनारे कैबिनेट की बैठक कर प्रदेश और प्रयाग के हित से जुड़े फैसले भी लेगी. महाकुंभ में इस बार विधानमंडल की विशेष बैठक भी बुलाने की तैयारी चल रही हैं, जिसमें आस्था क्षेत्र में सभी जनप्रतिनिधि एक साथ बैठेंगे. सीएम योगी आदित्यनाथ गुरुवार और शुक्रवार को प्रयागराज के दो दिवसीय दौरे पर थे. वहां उन्होंने 13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ की एक-एक तैयारियां परखीं. इस दौरान हुई व्यवस्थागत बैठकों में अधिकारियों को कैबिनेट के साथ विधानमंडल की संभावित बैठक की भी तैयारियों के निर्देश दिए हैं.
2019 में भी हुई थी योगी कैबिनेट की बैठक
योगी आदित्यनाथ बतौर सीएम 2019 में पहली बार कुंभ की तैयारियों के मेजबान बने थे. इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के विकास के साथ उन्होंने सरकार के अहम फैसलों के लिए भी संगम के तट को चुना था. 29 जनवरी 2019 को कुंभ में योगी ने पूरे कैबिनेट के साथ बैठक कर अहम फैसले लिए थे. इसमें मेरठ से प्रयागराज तक को जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना भी शामिल है. 12 जिलों को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेस-वे 594 किमी लंबा है। इसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है. एक बार फिर इसी महीने महाकुंभ में कैबिनेट की बैठक होने जा रही है, जिसमें प्रदेश के बुनियादी विकास से लेकर आस्था क्षेत्रों के कायाकल्प से जुड़े फैसले होने की उम्मीद है. पिछले महीने हुई प्रयागराज मेला प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में कैबिनेट बैठक सभी अन्य विशिष्ट आयोजनों के लिए बजट भी आवंटित किया जा चुका है.
विधानमंडल की बैठक की तारीख जल्द
महाकुंभ में होने वाले आयोजनों के इतिहास में एक नया पन्ना विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक के रूप में भी जुड़ सकता है. सरकार इसकी तैयारी में जुटी हुई है. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का कहना है कि बैठक के स्वरूप पर विचार हो रहा है. जल्द इसे अंतिम रूप दिया जाएगा. इतिहास के आईने में देखें तो जब आधिकारिक रूप से यूपी का अस्तित्व नहीं था, तब यहां 8 जनवरी 1887 को नार्थ वेस्टर्न प्रॉविंसेज ऐंड अवध लेजिस्लेटिव काउंसिल की पहली बैठक इलाहाबाद के थार्नहिल मेमोरियल हॉल में हुई थी, जिसमें 9 सदस्य शामिल हुए थे. वर्ष 2003 में जब केशरीनाथ त्रिपाठी यूपी विधानसभा के अध्यक्ष थे, तब भी यहां उत्तरशती समारोह आयोजित किया गया था. इसमें तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री, सीएम मायावती के साथ दोनों सदनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया था. लेकिन, मेला क्षेत्र में महाकुंभ के आयोजन के बीच यह संभवत: पहला अवसर होगा जब विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्य एक साथ जुटेंगे और आस्था के साथ ही जनव्यवस्था के स्वरूप का भी खाका खींचेंगे.
10 फरवरी को राष्ट्रपति का दौरा प्रस्तावित
महाकुंभ में आम आदमी के साथ संवैधानिक प्रमुखों के भी आगमन के कार्यक्रम तय हो रहे हैं. विभिन्न राज्यों के राजदूतों के साथ वहां की सरकारों के प्रतिनिधियों के भी महाकुंभ पहुंचने की तैयारी है. पीएम नरेंद्र मोदी ने इसी महीने कुंभ क्षेत्र से जुड़ी 5 हजार से अधिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया था. मेला अवधि के दौरान भी संगम में डुबकी लगाने वह आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार 10 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म का भी महाकुंभ में आने का कार्यक्रम तय हो रहा है.


















