बजट 2026-27 पर सख्त सवाल, अनुशासन तो दिखा, पर विकास की रफ्तार गायब – डॉ. विनय प्रकाश तिवारी
यूपी TIMES18 : SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार एवं Daddy’s International School, चंदौली के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने बजट 2026-27 पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट संतुलन और अनुशासन की कोशिश जरूर है, लेकिन इसमें वह आक्रामक दृष्टि नहीं दिखती, जो देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे सके। उनके अनुसार रक्षा, कैपेक्स और बाजार – तीनों मोर्चों पर सरकार का रुख सावधानी भरा है, जबकि मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों में भारत को अधिक निर्णायक कदमों की आवश्यकता थी।
रक्षा बजट : निर्यात की बात, खर्च में ठंडापन
डॉ. तिवारी ने कहा कि रक्षा बजट में लगभग ₹5.95 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो कुल सरकारी खर्च का करीब 11 प्रतिशत है। हालांकि यह अनुपात पिछले वर्षों जैसा ही है, लेकिन राशि के स्तर पर वृद्धि कमजोर नजर आती है। जब भारत ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा उत्पादों को लेकर भरोसा बन रहा है, ऐसे समय में घरेलू रक्षा खर्च में ठंडापन कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार रक्षा विस्तार की बजाय खर्च नियंत्रण के मोड में आ गई है या फिर अन्य योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने के दबाव में यह फैसला लिया गया है।
कैपेक्स : निवेश से पहले बचत की कोशिश
कैपेक्स यानी पूंजीगत व्यय को लेकर भी डॉ. तिवारी ने निराशा जताई। बजट में कैपेक्स को ₹11.81 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹12.9 लाख करोड़ किया गया है, जो लगभग ₹1 लाख करोड़ की वृद्धि है। उनके अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च का असर कई गुना होता है—इससे रोजगार सृजन होता है, स्टील-सीमेंट जैसे उद्योगों को बल मिलता है और छोटे कारोबारों तक काम पहुंचता है। यदि कैपेक्स को ₹14 लाख करोड़ या उससे अधिक तक ले जाया जाता, तो अर्थव्यवस्था को कहीं अधिक मजबूती मिलती। उन्होंने कहा कि सरकार राजकोषीय अनुशासन और विकास दोनों को साधने की कोशिश में है, लेकिन इस संतुलन में विकास की गति कमजोर पड़ती दिख रही है।
हाई-स्पीड रेल और ऊर्जा सेक्टर : उम्मीद की किरण
हालांकि बजट में कुछ सकारात्मक घोषणाएं भी की गई हैं। सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर – मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी की घोषणा को डॉ. तिवारी ने भविष्य की दिशा दिखाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि यदि ये परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र के संदर्भ में PFC और REC के पुनर्गठन को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। ये संस्थाएं बिजली परियोजनाओं और वितरण कंपनियों को वित्त उपलब्ध कराती हैं। इनके मजबूत होने से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ेगा, जो दीर्घकाल में आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।
बाजार और STT : भरोसे पर चोट
स्टॉक मार्केट पर बजट के असर को लेकर डॉ. तिवारी ने कहा कि तस्वीर निराशाजनक रही। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी कर फ्यूचर्स पर 0.02 प्रतिशत से 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.15 प्रतिशत करना सक्रिय ट्रेडर्स पर सीधा बोझ है। बजट भाषण के दौरान निफ्टी-50 का 25,437 के उच्च और 24,590 के निम्न स्तर तक जाना बाजार की मानसिक स्थिति को दर्शाता है। उनके अनुसार यह सिर्फ सामान्य उतार-चढ़ाव नहीं था, बल्कि इस बात का संकेत था कि निवेशक बड़े कैपेक्स, टैक्स राहत और विकास को तेज करने वाले कदमों की उम्मीद कर रहे थे, जो पूरी नहीं हो सकीं।
मध्यम वर्ग और टैक्स : उम्मीदें अधूरी
मध्यम वर्ग को लेकर उन्होंने कहा कि आयकर स्लैब में कोई राहत न देना निराशाजनक है। महंगाई, ईएमआई और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में टैक्स ढांचे में जरा भी बदलाव न करना आम लोगों की उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट के कुछ कदमों की उन्होंने सराहना की। शिक्षा के लिए ₹1.39 लाख करोड़ का आवंटन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व गेमिंग पर जोर भविष्य की दिशा दिखाता है, हालांकि जमीनी शिक्षा ढांचे में अभी भी बड़े सुधार की जरूरत है। स्वास्थ्य क्षेत्र में 17 कैंसर दवाओं पर शुल्क हटाना मानवीय और सराहनीय कदम बताया गया।
SGB और निवेशकों का भरोसा
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) नीति में बदलाव को लेकर डॉ. तिवारी ने निवेशकों के भरोसे पर चोट की बात कही। उन्होंने कहा कि पहले रिडेम्प्शन को टैक्स-फ्री बताया गया था, लेकिन अब व्याख्या बदलने से यह संदेश गया है कि नियम कभी भी बदले जा सकते हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
सरकारी खर्च की सच्चाई
सरकारी वित्त की सच्चाई पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जब 100 रुपये खर्च करती है, तो लगभग 24 रुपये उधार लेकर खर्च करती है। आय में करीब 21 रुपये आयकर से और 18 रुपये कॉर्पोरेट टैक्स से आते हैं, जबकि खर्च का बड़ा हिस्सा राज्यों को ट्रांसफर और पुराने कर्ज के ब्याज में चला जाता है। ऐसे में विकास पर खर्च की गुंजाइश सीमित रह जाती है।
अंत में डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि बजट 2026-27 अनुशासन की दिशा में कदम जरूर है, लेकिन देश को जिस तेज विकास की जरूरत है, उसके लिए और साहसिक फैसलों की अपेक्षा थी। सवाल यही है कि क्या यह सावधानी भविष्य में लाभ देगी, या भारत विकास के अहम अवसर गंवा देगा।


















