जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

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जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

चंदौली : सामान्य वर्ग की समस्याओं और विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश सचिव रत्नेश पाठक के नेतृत्व में सोमवार को राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने समेत कई मांगें उठाई गईं।

ज्ञापन में कहा गया कि सामान्य वर्ग में भी बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हैं। ऐसे में आरक्षण की व्यवस्था के कारण सामान्य वर्ग के प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को सरकारी सेवाओं एवं अन्य अवसरों से वंचित होना पड़ता है। वक्ताओं ने मांग की कि आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाए, जिससे सभी वर्गों के जरूरतमंद और प्रतिभाशाली युवाओं को समान अवसर मिल सके।

ज्ञापन में एससी/एसटी एक्ट में सुधार अथवा उसे समाप्त करने, यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 को वापस लेने तथा राष्ट्रीय सवर्ण आयोग के गठन की भी मांग की गई। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि एससी/एसटी एक्ट का कई मामलों में दुरुपयोग किया जा रहा है, इसलिए इसमें आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।

इस दौरान रत्नेश पाठक ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उनकी जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति के आधार पर अवसर और सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश जारी करने की अपील की।

ज्ञापन की प्रमुख मांगें

◆ जातिगत आरक्षण समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किया जाए।

◆ एससी/एसटी एक्ट में सुधार अथवा उसे समाप्त किया जाए।

◆ यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 वापस लिया जाए।

◆ राष्ट्रीय सवर्ण आयोग का गठन किया जाए।