घर-घर जाकर बच्चों का होगा नामांकन, सरकारी स्कूलों को कॉन्वेंट की तर्ज पर बनाया जा रहा आधुनिक, स्मार्ट क्लास, बेहतर सुविधाओं और डिजिटल शिक्षा पर जोर
चंदौली : जनपद में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही ‘स्कूल चलो अभियान’ (प्रवेशोत्सव) को जन आंदोलन का स्वरूप दिया गया है। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के निर्देशन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार स्वयं अभियान की कमान संभाले हुए हैं। उनका स्पष्ट निर्देश है कि 6 से 14 वर्ष तक का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और शत-प्रतिशत नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
इस अभियान के तहत शिक्षक, शिक्षामित्र और शिक्षा विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। ईंट-भट्टों, मलिन बस्तियों, झुग्गी-झोपड़ियों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान की जा रही है तथा उनके अभिभावकों को बच्चों का नामांकन कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बच्चों के मन में विद्यालय के प्रति उत्साह बढ़ाने के लिए सरकारी स्कूलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। नए विद्यार्थियों का रोली-चंदन का तिलक लगाकर, फूल बरसाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया जा रहा है, ताकि वे खुशी-खुशी विद्यालय आएं और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक माहौल बने।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार ने कहा कि अब सरकारी विद्यालयों को कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में सीएसआर (CSR) फंड और विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से स्मार्ट क्लास, सुंदर कक्षाएं, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय, बेहतर फर्नीचर, खेल सामग्री और ज्ञानवर्धक पेंटिंग्स जैसी सुविधाएं तेजी से विकसित की जा रही हैं, ताकि गरीब से गरीब बच्चे को भी गुणवत्तापूर्ण और डिजिटल शिक्षा मिल सके।
उन्होंने बताया कि कक्षा 5 और कक्षा 8 उत्तीर्ण करने वाले सभी विद्यार्थियों का क्रमशः कक्षा 6 और 9 में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके लिए ‘प्रेरणा पोर्टल’ जैसे डिजिटल माध्यमों से प्रत्येक बच्चे की ट्रैकिंग की जा रही है, ताकि कोई भी छात्र बीच में पढ़ाई न छोड़े।
बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को निर्देशित किया है कि ‘स्कूल चलो अभियान’ में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही अभिभावकों को यह भी बताया जा रहा है कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क है। बच्चों को मुफ्त यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकें, बैग, जूते-मोजे तथा मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके।


















