धर्म को जीवन में धारण करने वाला परेशान हो सकता है, पराजित नहीं : आचार्य शुभम् रामानुज
चंदौली : चहनियां क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़ गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा का आयोजन 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक किया जा रहा है। कथा के मुख्य यजमान तहसीलदार पाण्डेय, हीरामनी पाण्डेय एवं प्रकाश पाण्डेय हैं। कथा का रसपान श्रीधाम वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय युवा व्यास आचार्य शुभम् रामानुज श्री वैष्णवाचार्य जी महाराज श्रद्धालुओं को करा रहे हैं।
कथा के तीसरे दिन आचार्य शुभम् रामानुज ने कहा कि कलियुग में भगवान की भक्ति का सबसे सरल माध्यम उनकी कथा का श्रवण है। जो जीव श्रद्धा और प्रेम के साथ भगवान की कथा सुनने के लिए आता है, भगवान उसे सहर्ष अपने हृदय से लगा लेते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के लिए कोई वस्तु विशेष महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि भक्त के अंतःकरण का भाव, प्रेम, श्रद्धा और पवित्रता ही सबसे अधिक प्रिय है। भगवान बड़ी वस्तु को नहीं, बल्कि भक्त के भाव को देखते हैं।
उन्होंने कहा कि “रामहि केवल प्रेम प्यारा”, अर्थात भगवान को केवल प्रेम ही प्रिय है। यदि मन में सच्ची श्रद्धा और निर्मल भाव हो तो साधारण से साधारण व्यक्ति भी भगवान का सानिध्य प्राप्त कर सकता है।
सृष्टि क्रम का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि हमारे पूर्वज मनु और सतरूपा हैं। हम सभी मनु जी महाराज की संतति होने के कारण ‘मानव’ कहलाते हैं। उन्होंने धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिसके जीवन में धर्म होता है, उसकी तीनों लोकों में विजय होती है। धर्म से विमुख व्यक्ति को जीवन में पराजय का सामना करना पड़ता है। धर्म को धारण करने वाला जीव परेशान तो हो सकता है, लेकिन कभी पराजित नहीं हो सकता।
कथा के दौरान भक्ति और आध्यात्मिक प्रसंगों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से कथा का श्रवण किया।
इस अवसर पर डॉ. के.एन. पाण्डेय, मनोज उपाध्याय, राजेन्द्र पाण्डेय, अवधेश उपाध्याय, आलोक पाण्डेय, रजत मिश्रा, महेंद्र पाण्डेय, राम मनोज उपाध्याय सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।


















