गंगा का जलस्तर थमा, लेकिन खतरा बरकरार, बलुआ घाट पर डूबने की कगार पर यात्री विश्रामालय, तटवर्ती गांवों में बढ़ी धड़कनें
चंदौली : गंगा नदी का जलस्तर शनिवार की रात बढ़ने के बाद फिलहाल थम गया है, लेकिन तेज बहाव के चलते तटवर्ती इलाकों में खतरा अभी टला नहीं है। बलुआ घाट पर गंगा का पानी अब ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया है। घाट की एक सीढ़ी को छोड़कर लगभग सभी सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में यात्री विश्रामालय में भी पानी घुसने की आशंका बनी हुई है।
बताया जाता है कि गंगा के जलस्तर में करीब 28 जुलाई से लगातार वृद्धि हो रही थी। शुक्रवार की रात तक नदी लबालब भर गई। बलुआ घाट पर पुराने सीढ़ियों के बीच बना महिला चेंजिंग रूम तीन दिन पहले ही पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। वहीं नया चेंजिंग रूम और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से बनाया गया आराम गृह भी डूबने के कगार पर पहुंच गया है।
गंगा किनारे स्थित श्मशान घाट भी पहले ही जलमग्न हो चुका है। शवों के अंतिम संस्कार के लिए ऊपरी सतह पर बनाए गए टीनशेड वाले स्थान में भी पानी पहुंच गया है। शनिवार की रात जलस्तर थमने से फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन नदी का वेग लगातार बना हुआ है। यदि आगे और पानी छोड़ा गया या जलस्तर बढ़ा तो यात्री विश्रामालय समेत आसपास के अन्य हिस्सों में भी पानी घुस सकता है।
गंगा के बढ़ते वेग और कटान की आशंका को लेकर तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। कांवर, महुअरिया, बिसुपुर, महुआरीखास, सराय, बलुआ, महुअरकला, हरधन जुड़ा, विजयी के पूरा, गनेश पूरा, टांडा, बड़गांवा, तीरगांवा, हसनपुर, नादी और निधौरा समेत आसपास के गांवों में ग्रामीण नदी की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों को कटान और संभावित बाढ़ की चिंता सताने लगी है। वहीं बलुआ घाट के दुकानदार भी बढ़ते पानी को देखते हुए अपनी दुकानें समेटने में जुट गए हैं।
प्रशासन और ग्रामीणों की नजर अब गंगा के जलस्तर पर टिकी है। जलस्तर दोबारा बढ़ने की स्थिति में तटवर्ती क्षेत्रों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


















