मठ पीठाधीश्वर पहुंचे बाबा कीनाराम धाम, जन्मोत्सव के दृष्टिगत तैयारियों का लिया जायजा
चंदौली : चहनियां क्षेत्र के रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम मठ में बुधवार की शाम को पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ राम गौतम ने जन्मोत्सव को लेकर मठ परिसर, कार्यक्रम स्थल आदि का निरीक्षण किया. वही कार्यक्रम संयोजक अजीत सिंह से कार्यक्रम की जानकारी लिया. इस दौरान बाबा सिद्धार्थ राम गौतम ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बाबा कीनाराम का जन्मोत्सव समारोह धूमधाम से मनाया जाएगा. इसके लिए तैयारियां पूर्ण कर ली गई है. साथ ही शासन प्रशासन स्तर पर भी तैयारी चल रही है.

बता दे कि जिस प्रकार प्राकृतिक वैभव की दृष्टि से अत्यंत सरस व समृद्ध है. उसी प्रकार अध्यात्म साधना व निर्गुण-सगुण ब्रह्मा की प्राप्ति की दृष्टि से उतना ही समृद्ध रहा है. इस पवित्र धरती पर तमाम ऐसे साधक पैदा हुए जिन्होंने अपनी साधना का प्रयोग लोकहित में किया. इनमें अघोरपंथ के महान संत बाबा कीनाराम का अपना विशेष महत्व है. एक सितम्बर से बाबा के तीन दिवसीय जन्मोत्सव की शुरुआत हो रही है. जिसमें शिरकत करने यूपी सहित देश के कोने-कोने से वीआईपी, वीवीआईपी रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम धाम आते है.

अघोरपंथ के महान संत बाबा कीनाराम का जन्म चंदौली के रामगढ़ में 1601 ईसवी को रघुवंशी क्षत्रिय वंश में हुआ था. कालांतर में बाबा कीनाराम की शिष्य परंपरा में बाबा अवधुत भगवान राम ने अघोरपंथ को समाज से जोड़ने का कार्य किया. ऐसी किदवंती है कि अघोरपंथ के इतिहास में अनन्त स्थान रखने वाले संत बाबा कीनाराम बाल्यावस्था में ही अपने समवयस्क बालकों के साथ भजन-कीर्तन में लीन रहा करते थे. बाबा कीनाराम का विवाह 12 वर्ष की अवस्था में कर दिया गया, लेकिन गौना के एक दिन पूर्व उनकी पत्नी का देहावसान हो गया. बाबा कीनाराम का घर के कामकाज और पढ़ने-लिखने में मन नहीं लगता था.
एक दिन कीनाराम घर से निकल पड़े और गाजीपुर जनपद के कारो गांव में रामानुजी संप्रदाय के महात्मा शिवराम के पास पहुंचे और दीक्षा ली. उसके बाद बाबा कीनाराम ने तमाम चमत्कार से लोगों का भला किया. कालांतर में बाबा काशी के हरिश्चंद्र घाट पर आकर तप करने लगे, जहां उनकी भेंट अघोरी साधू बाबा कालूराम से हुई. बाबा कालूराम ने अपने वास्तविक स्वरूप का दर्शन देकर उन्हें क्रीं कुंड (काशी) में ले गए और अघोर मंत्र देकर कीनाराम को अपना शिष्य बना लिया. बाबा कीनाराम बीच-बीच में रामगढ़ भी आया करते थे. उन्होंने अपने गुरु शिवाराम की स्मृति में चार वैष्णव मठ मारुफपुर, नईडीह, परानापुर और महुअर में स्थापित किए. संवत् 1826 में 142 वर्ष की अवस्था में उन्होंने समाधि ली.
आपको बताते चलें कि रामगढ़ में स्थित आश्रम में एक चमत्कारिक कुआं है. जिसकी मान्यता है की यह ईंट से न बनकर गोबर के उपले से बनाया गया है. जिसमें 4 द्वार बनाए गए हैं, इस कुएं से चारों तरफ अलग-अलग स्वाद का पानी निकलता है. इस कुएं के पानी से स्नान करने मात्र से चर्म रोग, बुखार, मिर्गी, मूर्छा समेत तमाम असाध्य रोग खत्म हो जाते हैं.

वैसे तो पूरे साल बाबा के मठ भक्तों का मेला रहता है, लेकिन उनके अनुयायी बाबा के जन्मोत्सव को बड़े धूम-धाम से मनाते है. इस दौरान आसपास के जनपदों समेत देश विदेश लाखों भक्त बाबा के मठ पर आते हैं. वर्तमान में रामगढ़ स्थित उनके समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. श्रद्धालु उनका जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं.


















